विजय के साथ उसकी बीवी को पेला

हैल्लो दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम अनिल है और मेरी उम्र 34 साल है। में इंजिनियरिंग करने के बाद में कानपुर में अपने परिवार के साथ रह रहा हूँ। मुझे पिछले हफ्ते ही इस साईट के बारे में पता चला तो मैंने पिछले 7 दिनों में स्टोरी पढ़ने के अलावा कोई काम ही नहीं किया है। आज में अपनी पहली स्टोरी लिख रहा हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मेरी शादी हो चुकी थी, लेकिन मेरी वाईफ मुझे सेक्स का मज़ा नहीं दे पा रही थी, उसे सेक्स में मज़ा नहीं आता था। अब में अपने लंड के लिए तड़पता रहता था और सोचता था कि है खुदा तूने एक चूत दी और वो भी चुदवाती नहीं है, इतने साल तड़पा के रखा है, तुझे मुझ पर दया नहीं आती, खुदा एक एहसान कर दे, मेरे खड़े हुए लंड को किसी चूत से मिला दे, कोई तो सहारा दे।

खैर दोस्तों फिर ऊपर वाले ने मेरी सुन ली और मेरे दोस्त को मेरा मददगार बनाकर भेज दिया। उसका नाम विजय था और उसकी शादी हो चुकी थी, उसके 2 बच्चे भी थे, उसकी पत्नी सांवले रंग की सलोनी, होंठ तो गजब के थे, देखते ही नशा चढ़ जाए। उसे देखकर ही मेरा लंड खड़ा होने लगता था, लेकिन मेरी सारी इच्छाए मन में ही दब जाती थी। में सपने में सोचता था कि काश वो मिल जाए तो उसे उठने नहीं दूंगा और रातभर चोदकर ठंडा हो जाऊंगा। में और विजय दोनों एक ही उम्र के थे। यह बात उस समय की है, जब उसकी बेटी का बर्थ-डे था और विजय ने मुझसे जरूर आने को कहा था। अब मैंने हरिद्वार जाने का मन बना लिया था। अब रात को डिनर के बाद सभी बच्चे सो गये थे। फिर मैंने विजय और उसकी वाईफ आरू ने ड्रिंक लेना शुरू किया और फिर ये समा रात के 1 बजे तक चलता रहा। अब हम मदहोश हुए जा रहे थे, अब सारी बातें हो रही थी।

फिर मैंने भी उन्हें बताया कि में कैसे असंतुष्ट हूँ? और अब में अपनी किस्मत को कोष रहा था, मुझे नहीं पता था कि अब मेरी किस्मत जागने वाली है। फिर हम तीनों एक ही डबल बेड पर सो गये और हमें लेटते ही नींद आ गई। अब अभी आधा घंटा ही हुआ होगा कि मेरी नींद खुल गई। अब मुझे आहहह, आहहह, आहह, ओहहह, ऑश, आहहहह की आवाजे आ रही थी। अब विजय और आरू एक दूसरे से लिपटे हुए चुदाई का मजा ले रहे थे। अब मेरी आँखें खुली की खुली रह गई थी। अब चारों तरफ मादकता छाई हुई थी। अब मेरा लंड भी जोरो से उफान मारने लगा था। फिर मैंने विजय की तरफ देखा, तो वो जी जान से आरू को चोदने में लगा हुआ था। फिर थोड़ी देर में उसने अपना लंड बाहर निकाला और आरू के मुँह में दे दिया, तो आरू उसे मस्ती में लेकर चूसने लगी और उसका लंड 4 इंच लम्बा था।

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अब विजय का पानी निकल गया था, लेकिन आरू संतुष्ट नहीं थी। फिर मेरी विजय से नजरे मिली, तो उसने आँखों में ही आरू को चोदने के लिए कहा। अब आरू एकदम गर्म थी। फिर मैंने उसके हाथों में अपना 7 इंच का मोटा लंड पकड़ा दिया, तो मेरे लंड को पकड़ते ही वो चीख उठी और बोली कि कितना बड़ा और मोटा है? अब मुझ पर मस्ती चढ़ने लगी थी। अब मैंने उसे अपनी बाँहों में कस लिया था और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर जोर-जोर से चूसने लगा था। अब वो बहुत ही गर्म थी और आज पहली बार मुझे उसके नर्म होंठो का अहसास हुआ था। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब में अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स दबा रहा था और वो अपने मुँह से आवाज़े निकाल रही थी ऊहह, उउउफफफ्फ़ और ज़ोर से, अनिल चोद डालो, मेरी चूत प्यासी है। अब में उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूस रहा था। अब वो अपनी आँखों को बंद करके मादक आवाजे निकाले जा रही थी कि जैसे वो जन्मों की प्यासी हो, आहह।

अब में उसके बूब्स को चूसते हुए आगे उसके पेट और नाभि पर किस लेते हुए उसकी चूत को चूसने लगा था और वो मस्ती में आकर खा जाओ मेरी चूत को, आआअहह, आआअहह, पीईईई जाओ, आआ जैसे बोले जा रही थी। अब वो किसी मदहोश जानवर की तरह चिल्ला रही थी और अपने पूरे बदन को तोड़कर जोर-जोर से सिसकियाँ लिए जा रही थी ऊवू, एससस्स, ऊवू, उहहहहहहह। अब उसके हाथ मेरे पूरे बदन से लिपटे जा रहे थे और मेरे हर अंग में मस्ती भर रहे थे। फिर तभी मैंने अपने लंड को उसके मुँह में दे दिया और खुद उसकी चूत को चाटने लगा। अब हम 69 पोज़िशन में थे, अब में अपनी जीभ को उसकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था और वो चिल्लाए जा रही थी। अब अचानक से उसका तापमान बढ़ गया था आअहह और विजय का लंड फिर से खड़ा होने लगा था। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर उसने मुझसे कहा कि अब तुम अपना लंड चूत में घुसाओ और में मुँह में अपना लंड डालता हूँ। आज विजय भी मेरे लंड को देखकर उसकी तारीफ करना नहीं भूला था और बोला कि यार आज हम दोनों मिलकर आरू की बरसों की प्यास बुझा देंगे। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया। अब वो बड़ी सेक्सी आवाजे निकालने लगी थी। अब में भी मस्त हो गया था, अब मेरे मुँह से भी गर्म बातें निकल रही थी कि हाँ रानी अपनी चूत को इस लंड के लिए हमेशा खोले रखना, लो मज़ा, लो रानी ऊपर से बोल रहा था और वो नीचे से मेरा पूरा लंड लेने के लिए ज़ोर लगाते हुए बडबड़ा रही थी ऊऊओ मेरे चुदक्कड राजा, चोद दो अपनी बिना झाटों वाली इस चूत को और चोदो, फाड़ डालो इस साली चूत को, सुबह से बड़ी चुदासी हो रही थी, साथ-साथ गिरना आह। अब में चुदाई का मज़ा लेने लगा था और वो नीचे से अपने चूतड़ को उचका-उचकाकर चुदाई में मेरा भरपूर सहयोग करने लगी थी और बोली कि मेरे चोदूं सनम तुम्हारा लंड बड़ा जानदार है, ना जाने कितनी बार चुद चुकी हूँ? लेकिन ऐसा लगता है जैसे पहली बार चुद रही हूँ, मारो राजा धक्का और जोर से, अपना लंड पूरा पेल दो।

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अब मेरा लंड जोर-जोर से अंदर बाहर हो रहा था और उधर विजय ने अपना पानी फिर से आरू के मुँह में ही निकाल दिया था, तो वो आज उसका पूरा पानी पी गई थी। अब मेरा लंड पूरे जोरो पर चोदता जा रहा था और आरू मस्त हो रही थी मारो राजा और ज़ोर से, थक गये हो तो बताओ में ऊपर आकर चोद दूँ इस भोसड़ी को, ओह, अब में नहीं हाईईईईईईईईईईईई रुकककककककक सकती, ऑश, आहहह, आहह, लगता है में गइईई, ओह राजा तुम भी आआआ जाओ। अब वो नीचे से झड़ने के लिए बेकरार हो रही थी और में ऊपर से दनादन धक्के पे धक्के मार रहा था। अब पूरे कमरे में चुदाई का संगीत बज रहा था। अब में विजय कह रहा था कि विजय इसे चोद-चोदकर इतना मज़ा दूँगा कि ये मुझसे चुदे बिना रह ही नहीं पाएगी, यह मेरी चुदाई के लिए हर समय बेकरार रहेगी, ओह मेरी आरू जान एक बार फिर से साथ-साथ झड़ेगे, ओह अब तुम भी आआ जाओ और कहते हुए में उसकी चूत की गहराई में झड़ गया और वो भी मेरे साथ-साथ झड़ गई। अब में उसकी छाती से चिपक गया था, तो कुछ पल तो मुझे ऐसा लगा कि उसकी चूत ने मेरे लंड को फंसा लिया है। अब विजय यह सब देखकर मुस्कुरा रहा था और बोला कि आज तुमने इसकी प्यास बुझा दी। फिर थोड़ी देर तक हम उसी तरह से चिपके रहे। फिर मैंने मन में सोचा कि वाह ऊपर वाले तूने कमाल कर दिया, मेरे प्यासे लंड को मालामाल कर दिया और तेरे दरबार में देर है मगर अंधेर नहीं है, सुना था, लेकिन आज दीदार भी कर लिया या खुदा आज तुने मुझे मालामाल कर दिया है।

धन्यवाद …