टेलीफोन ऑपरेटर का प्रमोशन

हैल्लो दोस्तों, में दीपक और में एक सरकारी दफ़्तर में ऑफिसर हूँ और एक बार मेरा तबादला antarvasna Kamukta Hindi Sex Stories कुछ महीनों के लिए उतरप्रदेश के एक शहर में हुआ था। अब वहाँ जाते ही में पहले तो 2-3 दिन होटल में रहा और फिर मेरे सहकर्मी ने बातचीत करके हमारी टेलिफोन ऑपरेटर के घर में रहने का इंतजाम कर दिया। हमारी टेलिफोन ऑपरेटर का नाम सुनीता था, वो दिल्ली से ट्रान्सफर होकर आई थी। उसकी उम्र 28 साल, बदन एकदम स्लिम, रंग गोरा, बाल एकदम काले और आखें भूरी थी और वो काफ़ी सेक्सी महिला थी। मुझे हमेशा उसकी आँखे वासना से भरी हुई लगती थी और उसकी शादी 4 साल पहले ही हुई है, लेकिन उसके कोई औलाद नहीं थी, उसका पति बैंक में बाबू था। सुनीता को प्रमोशन चाहिए था, इसलिए वो मुझे बहुत मस्का लगाती थी ताकि में उसकी सिफारिश करके उसका प्रमोशन करा दूँ और उसका पति भी जब हम घर पर होते थे तो मेरी खूब खातिरदारी करता था और मुझसे कहता था कि में सुनीता का प्रमोशन करवा दूँ, तो में कहता था कि में पूरी कोशिश करूँगा।

फिर मैंने उसके घर रहते हुए महसूस किया कि सुनीता की सेक्स लाईफ अच्छी नहीं है, इसलिए वो कई बार मुझे जानबूझ कर अपनी चूचियों का दीदार कराती थी और मेरे सामने मटक-मटककर सेक्सी अदा से इतरा इतरा कर चलती थी। उस दिन शुक्रवार था और उसका पति एक हफ्ते के लिए दिल्ली ट्रैनिंग के लिए गया था। अब शाम को जब हम दोनों सुनीता और में ऑफिस से घर लौट रहे थे, तो तब मैंने सुनीता से कहा कि हम दोनों ही घर पर है तो खाना मत बनाना, में होटल से खाना मंगा लूँगा। फिर वो बोली कि ठीक है और फिर रास्ते में मैंने विस्की की बोतल खरीदी और घर आकर फ्रेश होकर में विस्की का पैग पीने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद सुनीता भी फ्रेश होकर मेरे कमरे में आकर बैठ गयी और बातें करने लगी। फिर मैंने बातें करते वक़्त महसूस किया कि वो बहुत ही कामुक हो रही थी कि इतने में होटल से खाना भी आ गया और अब हम दोनों खाना खाते-खाते बातें कर रहे थे।

अब वो जब भी झुककर मुझे सब्जी या रोटी देती थी, तो मुझे उसकी चूचियों के दर्शन होते थे, क्योंकि उसने ढीली नाईटी पहनी थी। फिर मैंने अचानक से सुनीता से पूछा कि सुनीता में कई दिनों से देख रहा हूँ कि तुम दिन प्रति दिन सेक्सी लगती हो, तुम्हारी सेक्स लाईफ कैसी है? तो वो बोली कि क्या दीपक जी में बहुत ही सेक्सी हूँ? मेरे पति 10-15 दिनों में केवल एक बार ही शारीरिक संबंध बनाते है और बहुत ही जल्दी खल्लास हो जाते है, जिससे मेरी सेक्स की भूख नहीं मिट पाती और मेरी इच्छा बरकरार रहती है। ख़ैर फिर में खाना खाकर अपने कमरे में चला आया। फिर थोड़ी देर के बाद वो मेरे कमरे में आई और बोली कि दीपक जी मुझे नींद नहीं आ रही है, इसलिए में आपके पास चली आई। फिर हम बातें करते हुए मज़ाक भी करने लगे। अब में मज़ाक के मूड में था तो मैंने कहा कि मुझे भी नींद नहीं आ रही है, चलो अच्छा है तुम्हारा साथ रहेगा और उठकर टेबल के पास गया, तो वहाँ पर केले रखे थे तो मैंने पूछा कि सुनीता जी केले चाहिए? बहुत ही लंबे और मोटे केले है।

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फिर वो मुस्कुराते हुए बोली कि पहले अपने केले तो दिखाओ। फिर में उसके पास चला आया और उसको एक बहुत बड़ा केला दिखाते हुए कहा कि सुनीता जी आप ये केला ले लो, ये बहुत ही अच्छा है, आपको मज़ा आ जाएगा। फिर वो भी मुस्कुराते हुए सेक्सी अंदाज़ में बोली कि ये केला तो नर्म है और मुझे तो एकदम कड़क और बड़ा केला चाहिए। फिर मैंने उसे दूसरा केला दिखाते हुए कहा कि तो ये ले लो। फिर वो आँख मारते हुए बोली कि मुझे कोई अच्छा सा केला चाहिए। फिर में सुनीता के पास आकर सोफे पर बैठ गया और अब मेरा लंड मेरी अंडरवियर के अंदर उछल कूद मचा रहा था और सुनीता की नजरे उस पर जमी हुई थी। फिर उसने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि तुमने तो वहाँ पर एक खास केला छुपाकर रखा है, उसे नहीं दिखाओगे? तो में बोला कि आप मज़ाक कर रही है। फिर वो बोली कि में मज़ाक नहीं कर रही हूँ। तब में बोला कि सुनीता जी यह आपके लायक नहीं है, ये बहुत ही बड़ा है। फिर वो बोली कि यह तो और भी अच्छी बात है, मुझे तो बड़ा केला ही चाहिए।

फिर मैंने शरमाते हुए अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकाला और बोला कि देख लो। फिर वो अपना सर झुकाकर बोली कि मुझे तुम्हारा केला पसंद है, मुझे यही केला चाहिए। फिर में बोला कि इससे तुम्हें बहुत दर्द होगा। फिर वो बोली कि बाद में मज़ा भी तो आएगा। फिर में बोला कि हाँ मज़ा तो बहुत आएगा, लेकिन ये केला खाने से आपकी फट सकती है। तब वो मुस्कुराते हुए बोली कि में तो बहुत दिनों से ऐसा ही केला खोज रही थी। फिर मैंने बोला कि आप सोच लो में इस केले का मज़ा आपको देने के लिए तैयार हूँ, आगे आपकी मर्ज़ी। अब सुनीता के बदन में मेरे लंड को देखकर आग सी लग उठी थी। फिर अचानक से सुनीता ने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर के बाद मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मैंने सुनीता से कहा कि अगर आप कहे तो में आपकी चूत को अपनी जीभ से चाट लूँ। फिर वो बोली कि तब तो और मज़ा आएगा, ऐसा करो में लेट जाती हूँ और तुम मेरे ऊपर आ जाओ। फिर वो लेट गयी और में उसके ऊपर 69 की पोज़िशन में हो गया, तो उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और में उसकी चूत को चाटने लगा। फिर जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई, तो उसके बदन में सुरसुरी सी होने लगी और वो सिसकारियाँ भरते हुए मेरे लंड को तेज़ी के साथ चूसने लगी। फिर कुछ ही मिनटों में उसकी चूत फड़फडाते हुए पानी छोड़ने लगी और अब वो बड़े ही प्यार से मेरे लंड को चूस रही थी। फिर मैंने बोला कि सुनीता जी आपकी चूत काफ़ी गीली हो चुकी है, अगर आप कहे तो अब में आपकी चुदाई करूँ। फिर वो बोली कि दीपक थोड़ी देर तक मेरी चूत को और चाटो, आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी है, में शादी से पहले अपनी एक सहेली से अपनी चूत चटवा-चटवाकर खुजली मिटाती थी। अब में फिर से उसकी चूत को चाटने लगा तो 5 मिनट के बाद वो फिर से झड़ गयी।

फिर वो बोली कि दीपक अब तुम मेरी चुदाई शुरू करो। अब में उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसके चूतड़ के नीचे 2 तकिये रख दिए, जिससे उसकी चूत एकदम ऊपर उठ गयी। फिर उसके बाद मैंने अपने लंड के सुपाड़े पर ढेर सारा अपना थूक लगाकर उसकी चूत की फांको को फैलाकर बीच में रख दिया और बोला कि देखो अब मेरा ये लंबा और मोटा लंड पूरा का पूरा आपकी चूत में आसानी से घुस जाएगा और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर दबाना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड उसकी कसी हुई चूत को चीरता हुआ उसकी चूत में घुसने लगा। अब उसे हल्का-हल्का दर्द होने लगा था। फिर जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में लगभग आधा घुसा तो सुनीता को बहुत ज़्यादा दर्द महसूस होने लगा और उसके मुँह चीख निकलने लगी। फिर में उसके चेहरे पर असहनीय दर्द को देखते हुए बोला कि बस थोड़ा सा सहन कर लो, अभी ये आपकी चूत में पूरा का पूरा बड़े आसानी से घुस जाएगा और मैंने अपना लंड दबाना जारी रखा।

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अब दर्द के मारे उसका बुरा हाल था और इधर वो दर्द के मारे चिला रही थी, दीपक उूउउफफफफ्फ धीरे उूउउइईईईईईईई माँ में मर गयी और उधर मैंने एक जोरदार धक्का लगाकर मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया। अब उसका पूरा बदन थर-थर काँपने लगा था और फिर उसने मुझसे रुक जाने को कहा, तो में रुक गया और उसके होंठो को चूसता हुआ उसकी चूचियों को मसलने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद जब उसका दर्द कुछ कम हो गया तो उसने कहा कि अब तुम बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर करो। अब में अपना लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा था कि कुछ ही मिनटो में मुझे उसकी चूत की सिकुड़न महसूस हुई। अब में समझ गया कि वो झड़ रही है और अब हम दोनों का पूरा बदन पसीने से नहा गया था।

फिर में 5 मिनट तक बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करता रहा। अब उसकी चूत झड़ने के कारण काफ़ी गीली हो चुकी थी और अब मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था। अब उसका दर्द भी कुछ कम हो चुका था और उसे भी मज़ा आने लगा था। फिर वो सिसकारियाँ लेते हुए बोली कि चोदो दीपक और चोदो, कस-कसकर चोदो मुझे, उफफफ्फ़ कई दिनों के बाद मेरी इस चूत की प्यास बुझी है और इस तरह की बातें करते-करते वो फिर से एक बार और झड़ गयी। अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर के धक्के लगाने लगा था। अब वो भी अपने चूतड़ उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी और बोली कि दीपक अब मुझे एकदम ज़न्नत का मज़ा मिल रहा है, जो कि मुझे आज तक कभी नहीं मिला था। अब में जोश में आकर उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी चुदाई कर रहा था। फिर कुछ ही मिनटों में वो तीसरी बार झड़ी तो मेरे लंड राज ने भी उसकी चूत में अपना लंड रस डाल दिया। फिर मैंने बेड की चादर से उसकी चूत को साफ कर दिया और फिर अपने लंड को साफ करने लगा। उस रात मैंने उसकी 3-4 बार जमकर चुदाई की। अब वो बहुत खुश थी और में भी बहुत खुश था और उसके पति के आने से पहले मैंने सिफारिश करके उसका प्रमोशन करवा दिया था, इसलिए वो उसके पति के होते हुए भी रात को छुपकर मेरे कमरे में आकर चुदवाती थी ।।

धन्यवाद …