मौसी की मस्तानी लड़की का मस्त मजा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रवि है और जब यह सब हुआ उस वक्त में 22 साल का था। में दिखने में स्मार्ट और 6 फुट लम्बा हूँ और ये बात उन दिनों की है, जब में अपनी ग्रेजुयेशन के फ़ाइनल ईयर में था और गर्मियों की छुट्टियों में अपने गाँव गया हुआ था। फिर जब में अपने घर पहुँचा तो मैंने देखा कि मेरी मौसी की बेटी नीता आई हुई है, जो अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ हमारे साथ बिताने आई थी। अब में उसे पूरे 2 साल के बाद देख रहा था, तब वो बहुत छोटी थी, लेकिन अब 5 फुट 5 इंच लंबी, साँवली, फिगर साईज 32-26-32 था। अब में बस उसे देखता ही रह गया था और मेरी नज़र उसके संतरे जैसे बूब्स पर चिपककर रह गयी थी। वो मुझसे 3 साल छोटी थी और अभी 12वीं क्लास में थी, लेकिन अब वो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी। मेरे घर में मेरी माँ और एक छोटी बहन है, मेरी मम्मी खेती का सारा काम खुद संभालती है और मेरी बहन 8वीं क्लास में है। मेरा घर बहुत बड़ा है और काफ़ी खुला हुआ है जैसा कि गाँव में होता है। मेरा कमरा फर्स्ट फ्लोर पर है, में ज्यादातर अपने कमरे में ही बैठकर टी.वी देखता हूँ या मैग्जीन और दूसरी किताबे पढ़ता रहता हूँ।

अब नीता जब से आई थी, तो में तब से उसे छूने के चूमने के नये-नये तरीके तलाश रहा था। अब कभी- कभी वो अपनी किताबें लेकर मेरे पास कमरे में पढ़ने आ जाया करती थी और में उसे पढ़ाने के बहाने से कहीं ना कहीं उसे टच करता रहता था और कभी कुछ समझाने का बाद उसके गाल पर प्यार से थप्पड़ लगाता या कोई ना कोई उसे जोक सुनाकर हँसाता, तो कभी उसके बाल पकड़कर खींच लेता, तो कभी उसे चिकोटी काट लेता। अब मेरी इन सब हरकतों को वो हंसकर टाल देती थी। अब धीरे-धीरे वो भी मुझसे मज़ाक करने लगी थी, तो कभी कोई बॉल उठाकर मुझे मार देती या कभी में पानी पी रहा होता तो गिलास हिला देती और जब में उसे पकड़ने के लिए भागता तो वो भाग जाती, लेकिन अगर कभी पकड़ी जाती, तो में उसे गुदगुदी करने के बहाने से बहुत देर तक उसके पेट पर कमर पर गांड पर अपना हाथ फैरता रहता, लेकिन मेरी कभी उसके बूब्स दबाने की हिम्मत नहीं हुई। फिर एक दिन माँ और मेरी बहन को एक प्रोग्राम में जाना था तो वो शाम तक वापस आने को बोलकर चली गयी। उस दिन सुबह के 10 बज चुके थे और में मज़े से अपने कमरे में रज़ाई ओढ़कर सो रहा था। तभी नीता वहाँ आई और मुझसे बोली कि भैया उठो चाय पी लो। फिर जब उसके दो तीन बार कहने से भी में नहीं उठा, तो उसने मेरी रज़ाई पकड़कर खींच दी और बोली कि और कितना सोओगे? अब उठो और चाय पी लो और नीचे चलो, वहाँ कोई नहीं है मुझे डर लग रहा है।

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फिर मैंने कहा कि डर किस बात का, तो वो बोली कि पता नहीं, लेकिन तुम नीचे चलो चाहो तो वहीं सो जाना, मुझे डर नहीं लगेगा और कम से कम में घर का काम तो कर लूँगी। फिर मैंने उठकर पानी की बोतल उठाई और कुल्ला किया और चाय पीने लगा और फिर चाय पीने के बाद में फिर से रज़ाई ओढ़कर सो गया और बेचारी नीता मुझे उठाती रह गयी। फिर जब उसका बस नहीं चला तो उसने पानी की बोतल उठाकर मेरे ऊपर कुछ पानी गिरा दिया, तो में गुस्से में उठा, तो वो भागने लगी, लेकिन मैंने दौड़कर उसे पकड़ लिया और बाकी बचा बोतल का पानी उसके सिर पर डाल दिया और कहा कि अब आया मज़ा। अब बोतल में आधे से ज्यादा पानी बचा था, जो उसके बालों को भीगोता हुआ उसके चेहरे पर आया और चेहरे से गिरकर सीधा उसके सीने को गीला कर रहा था। अब उसके बूब्स पूरी तरह भीग चुके थे। फिर जब उसे कुछ समझ में नहीं आया तो वो मुझे मारने के लिए दौड़ी तो में वापस से अपने कमरे में भागा। फिर वो मेरे पीछे-पीछे आई और मुझे मारने लगी, लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे बेड पर धकेल दिया और उसे गुदगुदी करने लगा। अब वो हँसने लगी और खुद को बचाने के लिए छटपटाने लगी।

अब इस बीच हमारे गाल सट गये थे और अब मुझे कुछ होश नहीं रहा था और मुझ पर एक नशा सा चढ़ गया था, तो मैंने नीता को पीछे से कसकर पकड़ लिया। फिर मैंने उसके कानों के नीचे के भाग को अपने होंठो में दबा लिया और चूसने लगा। अब उसका बदन एकदम ढीला पड़ गया था और उसके होंठो से सिसकियाँ फूटने लगी थी। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने होंठो से उसके गालों को चूमना शुरू किया। अब उसने अपने एक हाथ से मेरे बालों को पकड़ लिया था। अब में धीरे-धीरे उसे चूमता जा रहा था, कभी उसके गालों को तो कभी उसकी गर्दन को, अब वो आहें भर रही थी। फिर मैंने उसके कुर्ते को कंधे से थोड़ा नीचे किया और उसके कंधे पर चूमने लगा। अब मेरा एक हाथ उसकी चूची पर था और फिर मैंने धीरे से उसे दबाया तो नीता के मुँह से ज़ोर की सिसकारी निकली और वो मचल कर रह गयी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ पकड़ ली और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। अब वो आहें भरती जाती और में ज़ोर-ज़ोर से उन्हें मसलता जा रहा था। फिर जब उससे कंट्रोल नहीं हुआ तो वो मेरी तरफ घूम गयी और मेरे होंठो को अपने होंठो से चूसने लगी। फिर मैंने उसे अपनी बाँहो में भर लिया और उसकी गांड पर अपना हाथ फैरने लगा। फिर मैंने उसके हिप्स को ज़ोर से दबाया तो उसके मुँह से फिर से सिसकारी फूट पड़ी। अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था तो मैंने उसका कुर्ता पकड़ा और एक बार में ही निकालकर दूर फेंक दिया। अब वो मेरे सामने सफ़ेद ब्रा पहने खड़ी थी और अब उसकी आधी चूचीयाँ ब्रा से बाहर झाँक रही थी। फिर मैंने नीता की कमर में अपना हाथ डाला और उसे अपने करीब खींच लिया और फिर अपने गर्म होंठ उसके सीने पर रख दिए और उसकी चूची को चूमने लगा। अब मेरा एक हाथ उसकी एक चूची को दबाता और दूसरे हाथ को उसकी चूत पर रख दिया और उसकी सलवार के ऊपर से रगड़ने लगा। अब में जितना उसकी चूत रगड़ता तो उतना ही नीता अपने पैर फैला लेती।

फिर मैंने धीरे से उसकी ब्रा के हुक खोलकर उसकी चूचियों को आज़ाद कर दिया। अब उसकी नंगी चूचियाँ देखकर मेरा मन काबू से बाहर हो गया था और में उन्हें पीने लगा था। अब नीता की हालत बुरी हो गयी थी, अब उसने अपने दोनों हाथ मेरे सिर पर रख दिए थे और मेरे बालों को मसलने लगी थी। फिर में उसके पेट को चूमता हुआ उसकी चूत के ऊपर आ गया और उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमने लगा। अब नीता की सिसकियाँ और बढ़ गयी थी, तो तभी मैंने उसकी चूत पर हल्के से काट लिया, तो उसके मुँह से ज़ोरदार सिसकी निकली। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसकी सलवार एक झटके से खींचकर उसके पैरों से बाहर कर दी और फिर उसकी पेंटी भी उतार फेंकी। अब उसकी चूत को देखकर मेरा लंड पानी छोड़ने लगा था और उसकी चूत एकदम साफ थी। उसकी चूत पर बालों का कोई निशान नहीं था।

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फिर मैंने उसकी चूत पर एक ज़ोरदार किस किया और जल्दी-ज़ल्दी अपना पजामा और अंडरवियर एक साथ उतार फेंका। अब मेरा 7 इंच लंबा लंड देखकर वो घबरा गयी और बोली कि भैया यह दर्द करेगा, तो मैंने कहा कि नहीं करेगा, में धीरे-धीरे करूँगा। फिर वो बोली कि लेकिन अगर दर्द किया तो बाहर निकाल लेना। फिर मैंने कहा कि निकाल लूँगा और अब जल्दी से अपने दोनों पैर फैला, अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है। फिर वो बोली कि कंट्रोल तो मुझसे भी नहीं हो रहा है, आज आपने ना जाने कैसी आग लगा दी है? अब मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। फिर मैंने कहा कि चिंता मतकर आग में बुझा दूँगा तू बस मुझे सपोर्ट कर, तो वो बोली कि ठीक है। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के दरवाज़े पर रखा और धीरे से अपनी कमर को हिलाया तो मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के अंदर चला गया और नीता के मुँह से आह निकल गयी। फिर मैंने अपने एक हाथ से उसकी चूची को मसलना शुरू किया और दूसरी चूची पर अपने होंठ रख दिए और उसके निपल्स को अपनी जीभ से चाटने लगा।

अब उसे कुछ मज़ा आने लगा था और अब वो अपनी कमर को उछालने लगी थी। फिर एक और धक्के में मेरा पूरा लंड नीता की चूत में समा गया, तो उसके मुँह से एक चीख निकली, लेकिन फिर धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो गया और में ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदने लगा। फिर जब मेरा लंड झड़ने को हुआ तो मैंने अपना लंड बाहर निकालकर नीता के पेट पर रख दिया और वहीं पर अपना सारा वीर्य निकाल दिया। अब दिसम्बर के महीने में भी हम दोनों पसीने से लथपथ हो गये थे और एक दूसरे को बाहों में लिए पड़े थे। अब नीता गहरी-गहरी साँसे ले रही थी, अब उसने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया था। फिर वो बोली कि भैया जो हुआ वो ग़लत है या सही, में नहीं जानती, लेकिन मुझे आपका साथ अच्छा लगता है। फिर मैंने उसे एक नज़र देखा और उसके होंठो पर किस करने लगा। फिर जब कभी भी मुझे कोई मौका मिला तो हमने चुदाई का खूब आनन्द लिया और खूब मजा किया।

धन्यवाद …