हॉट बेडशीट वाला मुंबई में-1

हैल्लो दोस्तों, में फिर से आपके सामने एक और नयी हक़ीकत लेकर हाजिर हूँ। में अपने रूम पार्टनर के साथ रहता हूँ, हम 3 लोग 2BHK फ्लेट शेयर करते है, सभी लोग अच्छी जॉब में है। मेरी जॉब का टाईम थोड़ा लेट है। में दोपहर में लगभग 2 बजे घर से निकलता हूँ और रात को 11-12 बजे तक वापस आ जाता हूँ। मेरे बाकी 2 रूम पार्टनर मोर्निंग शिफ्ट में ऑफिस जाते है, उसके कारण वो दोनों सुबह 9 बजे के पहले ही घर से निकल जाते है। ऐसी ही एक सुबह की बात है में करीब 10 बजे उठा और अभी-अभी नींद से जागने के कारण मेरा लंड खड़ा था। फिर में अपने लंड के अंडो को खुजाते-खुजाते बेडरूम से बाहर आ गया।

अब मेरे दोनों रूम पार्टनर पहले ही जा चुके थे। अब में घर में अकेला ही था, अब आराम से मूतने के बाद मुझे थोड़ा हल्का लगने लगा था। अब मेरा लंड नॉर्मल रूप में आ गया था, फिर में अपने रुटीन कामों में लग गया। अब जब घर में कोई नहीं होता तो में टायलेट से आने के बाद नंगा ही इधर उधर घूमता हूँ और आज भी में अपनी ही मस्ती में नंगा होकर न्यूज़ पेपर पढ़ते-पढ़ते चाय की चुस्कियां ले रहा था। फिर चाय पीने के बाद मैंने सोचा कि अब नहा लेता हूँ फिर नाश्ता करने बाहर निकलूंगा, अभी ऑफीस जाने के लिए बहुत टाईम था तो में नहाने चला गया। अब में बाथरूम में नंगा होकर अपनी मस्ती में नहा रहा था, अब मेरा नहाना जस्ट ख़त्म होने ही वाला था कि वैसे ही डोर बेल बज गयी। अभी घर में तो डोर ओपन करने के लिए और कोई नहीं था, तो में वैसे ही नहाने लगा।

फिर मैंने सोचा कि जो कोई भी होगा बेल बजा-बजाकर चला जाएगा, लेकिन फिर से डोर बेल बजने लगी। फिर 1 सेकेंड में मेरे मन में ख्याल आया कि कहीं इंटरनेट कनेक्शन वाला तो नहीं है? जो पैसे लेने आया हो और झट से मेरे सामने वो क्यूट सा लड़का आ गया, जो हमारी बिल्डिंग में इंटरनेट कनेक्शन मैनटेन करता है। अब उसका ख्याल आते ही मेरे लंड में थोड़ी सी हलचल हो गयी थी। फिर मैंने बिना देर किए झट से अपनी कमर में टावल लपेटकर बाथरूम से बाहर आ गया और ज़ोर से आवाज़ लगाई, अरे भाई रूको आया। फिर में बाथरूम से ऐसे ही गीले बाल और गीला बदन लेकर बाहर आ गया। अब मेरी गोरी छाती और सेक्सी बदन से पानी की बूंदे अभी भी ज़मीन पर गिरने से पहले पूरे बदन से रेंगती हुई धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ रही थी, मानो मेरे जिस्म से वो अलग होना ही नहीं चाह रही थी।

अब मेरी पतली कमर और रसीली गांड को एक छोटे से टावल ने छुपाकर रखा था और ऊपर मेरी छाती पर निपल्स पूरे गीले होने की वजह से और चमक रहे थे और मेरे बालों से पानी मेरे चेहरे पर टपक रहा था। फिर मैंने चाबी के छेद से बाहर देखा तो यह इंटरनेट वाला तो नहीं था, लेकिन कोई लड़का था जिसे में नहीं पहचानता था। फिर मैंने दरवाजा ओपन किया और सिर्फ़ अपना चेहरा बाहर निकालकर मैंने एक ही नज़र में उसे ऊपर से नीचे तक निहार लिया। उसकी उम्र करीब 20-21 साल होगी और उसका रंग सांवला, तेल से लथपथ चिपचिपे बाल और धूप के कारण माथे पर थोड़ा पसीना था, ऐसा लग रहा था कि वो किसी गावं से आया है और नीचे पैरों के पास एक बड़ा सा पोटला रखा हुआ था। फिर मैंने उससे पूछा कि कौन है? क्या चाहिए? तो उसने कहा कि भैया जी में बेडशीट बेचता हूँ, आप कहो तो दिखा दूँ? तो फिर मैंने बोला कि नहीं चाहिए और झट से दरवाजा बंद कर दिया।

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अब में अंदर जा ही रहा था कि मेरे मन में शैतान जाग गया। फिर मैंने वापस से दरवाजा खोला और देखा, तो वो ऊपर के फ्लोर पर जा रहा था। फिर मैंने उसे आवाज़ लगाई सुनो, तो वो झट से वापस आ गया। फिर मैंने उससे पूछा कि किस टाईप की बेडशीट्स है? फिर जैसे ही मैंने बेडशीट्स खरीदने में दिलचस्पी दिखाई, तो उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी। फिर वो बोला कि अरे बाबूजी बहुत बढ़िया बेडशीट्स है, आप एक बार देख तो लीजिए और वो वहीं पर बैठकर उसका पोटला खोलने लगा। फिर मैंने उससे बोला कि अरे-अरे यहाँ नहीं अंदर आ जाओ, तो वो झट से अंदर आ गया और ज़मीन पर अपना पोटला रखकर खुद भी नीचे बैठ गया। फिर मैंने उसे सोफे पर बैठने को कहा, तो वो बोला कि नहीं-नहीं बाबूजी माल दिखाने में नीचे ही बैठना सही रहेगा और वो अपने पोटले को खोलने में लग गया।

अब में उसे और ज्यादा ध्यान से देख रहा था, उसके कपड़े थोड़े मैले थे, लेकिन उन पुराने और मैले कपड़ों से उसकी गावं की मर्दानगी छुप नहीं रही थी, उसके हाथ पूरे लोहे जैसे सख़्त दिख रहे थे और वो बड़ी इच्छा से अपनी बेडशीट्स को एक-एक करके खोलने में लग गया। मुझे उसकी लोकल बेडशीट्स में कुछ भी दिलचस्पी नहीं थी, अब मुझे दिलचस्पी थी तो बस उसकी जवानी में। फिर मैंने उससे पूछा, कि तुम कहाँ से हो? तो उसने कहा कि भैया जी में बिहार से हूँ। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम इधर यह चादर ही बेचते हो? तो उसने कहा कि हाँ भैया जी, अभी तो यह चादर ही बेच रहा हूँ, वैसे सीज़न के हिसाब से और भी काम कर लेते है। फिर मैंने उससे पूछा कि पानी पीओगे? तो उसने कहा कि हाँ भैया जी आपकी बड़ी मेहरबानी होगी। अब में उसके सामने जानबूझ कर अपनी कमर मटका-मटकाकर चलते हुए अंदर की और चला गया। मैंने देखा कि वो मुझ में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था, लेकिन जब में अंदर की और अपनी कमर मटका-मटकाकर जा रहा था, तो मैंने यह भाँप लिया था कि वो मुझे घूर रहा है। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर में एक गिलास पानी लेकर आया और उसने पूरा पानी का गिलास एक झटके में ख़त्म कर दिया। तब तक उसने बहुत सारी बेडशीट्स बाहर निकालकर रखी थी। अब में सामने जाकर सोफे पर बैठ गया, दोस्तों आप समझ रहे हो ना पोज़िशन? अब में सिर्फ़ अपने छोटे से टावल में सोफे पर बैठा था और मेरे ठीक सामने जमीन पर वो बैठकर एक-एक बेडशीट खोलकर दिखा रहा था। फिर जैसे ही मैंने एहसास किया कि टावल के नीचे से वो मेरे लंड को बराबर देख सकता है, तो उसी एहसास से मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। अब में उसकी हरकत देख रहा था, अब वो चादर दिखाते-दिखाते अपनी आखों से मेरे टावल में देख रहा था और हल्का-हल्का मुस्कुरा भी रहा था। अब उसके इस व्यवहार से में थोड़ा रिलेक्स हो गया था। अब वो एक-एक बेडशीट खोलकर दिखा रहा था और उसकी कीमत और खूबियां बता रहा था, लेकिन में बस उसे निहार रहा था। अब मेरे टावल के नीचे मेरा लंड पूरा उफान पर था और अब मेरा लंड टावल को ऊपर उठाकर उस अजनबी को सलामी दे रहा था।

अब वो बोला कि साहब आप ठीक से बैठिए ना, आपका वो और वो बोलते-बोलते चुप हो गया। फिर मैंने अंजान बनते हुए पूछा कि क्यों भाई? क्या हुआ? तो उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया और फिर से मुस्कुराया। फिर मैंने भी मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर मसल दिया और बोला कि अच्छा यह क्यों? क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा क्या? अब मेरे ऐसे बोलते ही वो कुछ सकपका गया और फिर से चादर दिखाने लगा। फिर मैंने उससे वही सवाल पूछा, तो वो चुप हो गया। फिर मैंने उससे हँसते-हँसते कहा कि यह बेडशीट दिखाना छोड़ो और तुम्हारा भी वो दिखा दो। अब मेरे ऐसे कहते ही वो भड़क गया और गुस्सा हो गया और बोला कि क्या बात कर रहे हो साहब? में ऐसा वैसा लड़का नहीं हूँ, बेडशीट लेनी नहीं है तो पहले ही बोल देते और फिर वो अपनी बेडशीट्स जमा करने में लग गया।

फिर मैंने उससे कहा कि अरे तुम तो नाराज़ हो गये, अच्छा एक काम करो में तुम्हारी 1 नहीं 4 बेडशीट्स खरीद लूँगा, बस तुम अपना हथियार दिखा दो, लेकिन वो और गुस्सा हुआ और बोला कि साहब ग़रीब का मज़ाक मत उड़ाओं। फिर में अपना लंड फिर से मसलते हुए बोला कि तूने मेरा तो देख लिया, अब अपना भी दिखा दे और एक बात सुन अगर तू मुझे लंड दिखाएगा तो में तेरा लंड चूस भी दूँगा। फिर वो बोला कि साहब में ऐसे गंदे काम नहीं करता हूँ और वो अपनी पोटली फटाफट पैक करने लगा और फिर बाहर जाने के लिए पोटली अपने कंधे पर उठाकर दरवाजे की तरफ बढ़ गया। अब उसने अपने दोनों हाथों से पोटली अपने कंधे पर पकड़ी हुई थी। मैंने दरवाजा का लॉक पहले ही अंदर से बंद कर रखा था। फिर उसने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसको लॉक का सिस्टम शायद समझ में नहीं आया, तो उसने मेरी तरफ देखा। अब में समझ गया था कि यह मुझे दरवाजा खोलने के लिए बोल रहा है।

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फिर जैसे ही में सोफे से उठा तो मेरा टावल झट से नीचे गिर गया तो फिर मैंने उसकी तरफ देखा, लेकिन वो दरवाजे की तरफ ही देख रहा था, उसे मेरे नंगे होने का एहसास नहीं हुआ था। अब एक गबरू जवान लड़का मेरे सामने खड़ा था और में पूरा नंगा था, अब इस ख्याल से मेरी गांड में खुजली तो होगी ही ना? अब में बिना टावल उठाए वैसे ही मेरी नंगी, गोरी, चिकनी, रसीली गांड लेकर उसके सामने जाकर दरवाजे के लॉक को खोलने का नाटक करने लगा। अब मुझे पूरा यकीन था कि वो पीछे से मेरी गांड देख रहा है। अब में लॉक खोलने की बजाए जानबूझ कर डबल लॉक करके उसे खोलने का निरर्थक प्रयास करने लगा, ताकि वो मेरी चुदासी गांड का और ज़्यादा समय तक दीदार कर सके।

अब में उसे ऐसा दिखा रहा था जैसे मुझसे दरवाजा ओपन नहीं हो रहा है। फिर मैंने बोला कि साला निकल ही नहीं रहा है, लगता है जाम हो गया है। फिर मैंने जानबूझ कर अपनी गांड पीछे करके दरवाजे को खींचकर ओपन करने का प्रयास किया और अब ऐसा करते ही मेरी गांड उसके लंड के करीब जाकर टकरा गयी और वो झट से पीछे हट गया। फिर मैंने पीछे मुडकर देखा और उसे एक कातिलाना स्माइल दे दी, लेकिन वो साला गंदा सा मुँह बनाए दरवाजा ओपन होने का इंतजार कर रहा था। फिर मैंने सोचा कि चलो जाने दो, यह शिकार फंसने वालों में से नहीं है। फिर मैंने सही से दरवाजा ओपन किया और खुद को दरवाजे के पीछे छुपाकर उसके लिए बाहर जाने का रास्ता खोल दिया और फिर वो जल्दी से बाहर निकल गया …

दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में …