Hindi Sex Stories पहलवान की मस्त बीबी

कहानी है हमारे पड़ोसी पहलवान राज की। उसका उमर 25 साल होगा और वह मुक्केबाज है, उसके भय से सारा मुहल्ला डरता है। मैं रामचरन दूधिया हूं और उसके घर दूध पहुंचाता हूं। हर रोज वह मार्निंग वाक और एक्सरसाईज के लिए बाहर चला जाता है। इसके बाद जब मैं दूध देने जाता हूं तो उसकी खूबसूरत बीबी दूध लेने दरवाजे पर पहुंचती थी। वो एक झलक देख कर मेरी लुंगी टाईट हो जाती थी। वो खूबसूरत गोरी, दूधिया रंग की मस्त माल है और साड़ी में कभी, कभी नाईटी में ही चली आती थी दूध लेने। उस दिन रविवार था और राजू भैया कहीं बाहर मुक्केबाजी में गए थे। मैने उस दिन भाभी से बात करने के बारे में सोचा। जैसे ही मैने आवाज दी, भाभी उस दिन जल्दी ही चली आई दरव्वाजे के पास, मानो कि वो मेरा इंतजार ही कर रही हो। मैने उसको कहा कि भाभी हिसाब करना है दूध का तो बोली कि कोई बात नही, उसने सफेद रंग की पारदर्शक नाईटी पहनी हुई थी और उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

मैने अंदर घुस कर उसके डाइनिंग हाल में बैठ गया, उसके यहां वो और उसके पति मुक्केबाज राजू ही रहा करते थे। उसने मुझे बिठा कर दूध ढालने के लिए बर्तन लाई, जब मैं दूध दे रहा था तो वो झुक कर अपने बर्तन को नीचे की, और उसकी ढलकी चूंचियां, नाईटी से बाहर आकर एकदम मेरे सामने गेंद की तरह लटक गयीं। मेरा सर चकरा के रह गया। मैने अपनी निगाहे नहीं हटाईं और दूध बजाए आधा किलो के पूरा एक किलो उड़ेल दिया। तो वो हंसने लगी, बोली ध्यान किधर है देव्वर जी, दूध तो ज्यादा दे दिया आपने। मैं झेंप गया और बोला भाभी जी, वो क्या है कि मैं थोड़ा भूल गया था। इतने पर वो हंसने लगी और फिर बोली, लगता है आप सोच रहे होंगे कि भाभी के पास भी दूध है तो वो दूध हमसे क्यों मंगाती हैं। मैं तो और भी शरमा गया, हाय ये क्या कह रही थी वो। मैने कहा कि रुको भाभी, जरा मुझे बाथरूम लगी है, कर के आता हूं। तो उसने सीढियों के पास वाले बाथरुम की तरफ ईशारा कर दिया।

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मैं अंदर गया और जानबूझ कर के दरवाजा खुला छोड़ दिया। लुंगी उठा के जैसे ही मूतने लगा, कि भाभी ने आकर दरव्वाजा खोल दिया और मुंह दबा के हसने लगी, बोली मूतने के बहाने लंड खड़ा करने आए, हो। इसे तो मैने अपनी चूची दीखाके ही खड़ा कर दिया था देवर जी। और उसने थोड़ी देर में जब मैं बाहर निकला तो लुंगी खोल दी मेरी खीच कर। यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे । हद है, मैने लंगोट पहन रखी थी। भाभी ने कभी लंगोट न देखी थी तो कहने लगी ये क्या लपेट रखा है इसमें। मैने कहा भाभी ये लंगोट यादव लोगों की स्पेशल होती है। और इससे लंड सुरक्षित रहता है। ऐसा सुन कर भाभी हंसने लगी और बोली कि ये क्या सुरक्षा करेगा और उसने मेरी लंगोट खींच दी। अब मेरा लंड उसके सामने बेनकाब खड़ा था। वो लौड़े को पकड़ कर चूसने लगी तो मैने कहा कि भाभी अब तक तो ये खड़ा हो गया होता लेकिन क्या है कि राजू मुक्केबाज के डर से अभी तक आधा ही खड़ा है।
तो वो बोली कि बस बस कोई बात नहीं साला नामर्द हिजड़ा है वो, चूतिया अव्वल दरजे का, सारा दिन मुक्के बाजी करता है और शाम को चूत को अकेला ही छोड़ देता है। जितना गठीला शरीर है साले का उ तना ही ढीला लंड है चूतिए का। उसकी बात ना करो वो सीधा शाम को ही आने वाला है यहां पर। मैने कहा अच्छा? ऐसी बात है तो ठीक है। और भाभी मेरे सामने बैठ कर मेरे लंड को सहलाने लगी। अंडो को छेड़ते हुए उसने मेरे लड की चमड़ी उपर नीचे की और फिर मुह में डाल कर उसे चूसने लगी। आह्ह आह्ह उफ्फ वो तो उसे एकदम खा जाने पर आमदा थी। मैने उसके बाल पकड़ लिए और वो जैसे ही लंड पर दबाव बढाती मैं उसके बाल खींच देता वो थोड़ी धीमी हो जाती। अब उसके मुखमैथुन की लगाम मेरे हाथों में थी। मैने उसे पांच मिन्ट तक देसी मुखमैथुन का मजा दिया और फिर उसे सोफे पर बिठा के उसकी नाईटी उतार दी। उसकी टांगे खोल झांटदार चूत को छेड़ने लगा, और एक उंगली कर के देखा तो एकदम टाईट थी। फिर मैने उसकी झांटों को अपने जीभ से हटाते हुए चूसना शुरु कर दिया और गांड में उन्गली करते हुए उसे मुखमैथुन का मजा देता रहा।

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वो एकदम पागल हो जाती और इसी के साथ ही हमने अपना खड़ा लंड बैठे ही बैठे उसकी गांड में घुसा दिया और दो हाथों पे अपने को उपर उठाते हुए अपने दोनो पैर सोफे पर फेंक दिये। अब मेरे दोनों पैर सोफे पर थे और नीचे दोनों हाथों के सपोर्ट से अपने गांड को उठाए मैं लंड को धक्का देने के लिए तैयार था। इस आसन में छेद की मा बहन हो जाती है। यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे । इसलिए मैने अब चोदना शुरु किया। गांड चोदन के इस कार्यक्रम में भाभी को चिल्लाने के अलावा कोई काम बचा न रहा। वो आह फट गयि मेरी गांड आह इसमें तो मैं पेलवाती ही नहीं आह धीरे करो पूरा ना डालो यही सब करती रही और मैं ने चोद्ना जारी रखा। जब दस मिनट हुए तो मैने भाभी को अपने लंड पर बिठा खुद सोफे पर बैठ गया।

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उसके दोनो चूचे मेरे मुह में आ रहे थे और वो धका धक अपनी गांड उठा उठा के मुझे चोद रही थी, आह कितने दिन तक ऐसी चुदाई को तरसी मैं। पेलो मुझे और पेलो और उसने जम के धक्के लगाने जारी रखे मैं उसके स्तनों को पीता और कुचलता रहा अपने हाथों से। जब जीभर के पी चुका तो मैने भाभी को चार पैरो पर करके पीछे से कुतिया स्टाइल में दस मिन्ट और चोदा और उसकी चूत को एकदम चोद चोद कर हल्वा बना दिया। वो खुश हो गयी थी और जब मैने अपना गरमा गरम वीर्य उसके चूत में छोड़ दिया तो वो मारे खुशी के पागल हो गयी और मेरे लंड पर लगे बचे खुचे माल को भी चाट कर स्फाचट कर गयी। उसने कहा अब तुम दोनों टाईम दूध दोगे, जिससे हम दोनो टाईम मिलेंगे। दूधिए के लंड का कमाल देखा आपने तो आईये चैट करिये ऐसी ही भाभियो से सजीव चैट