कानपुर वाली की मस्त जवानी को लूटा

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna यह 10 दिन पहले की बात है, जो आज में आपको बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम महेश है, मेरी उम्र 34 साल है, में बैंक में काम करता हूँ, इस समय मेरी पोस्टिंग जमशेदपुर में है और मुझे रहने के लिए बैंक ने फ्लेट दिया है। अभी 10 दिन पहले मेरे बगल वाले फ्लेट में कुछ मेहमान आए थे। पड़ोस में मेरा जाना होता रहता है। फिर उस दिन शाम को में बैंक से आया तो बगल में चला गया। फिर वहाँ पता चला कि कानपुर से उनके भैया-भाभी आए है, उनके साथ उनकी 18 साल की बेटी भी थी। फिर बातों-बातों में पता चला कि वो 12वीं क्लास में पढ़ती है, वो स्कूल में छुट्टी थी इसलिए घूमने आए थे, उसका नाम रश्मि था। फिर मैंने देखा कि वो सी.डी प्लेयर देखने में लगी हुई थी। फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने पापा से बोली कि जब वी मेट मूवी का पार्ट सी.डी में नहीं चल रहा है। तो उसके पापा ने कहा कि कोई और मूवी लगा ले, लेकिन वो गुस्सा होने लगी।

फिर मैंने रश्मि से कहा कि मेरे पास जब वी मेट की सी.डी है, वो ले सकती है और फिर वहाँ चाय पीने के बाद में अपने फ्लेट में आ गया और फ्रेश होने के लिए शॉवर में घुस गया। अब मैंने अभी नहाना शुरू ही किया था की डोरबेल बज गयी। फिर 2-3 बार बजने पर में टावल लपेटकर बाथरूम से निकला और डोर खोला, तो बाहर रश्मि खड़ी थी, उसके बूब्स टी-शर्ट में से मस्त लग रहे थे। अब मेरा लंड मूड में आने लगा था। फिर मैंने उसे रुकने के लिए कहा और रूम से सी.डी लेने चला गया। अब मैन डोर थोड़ा खुला हुआ था और फिर जब में सी.डी लेकर आ रहा था तो फर्श पर पानी होने से मेरा पैर स्लिप हो गया और गिर पड़ा। फिर रश्मि ने जब देखा, तो वो मुझे उठाने के लिए अंदर आ गयी और मुझे उठाने की कोशिश करने लगी, तो उसी वक्त ऐसा हुआ तो मेरा टावल खुल गया और अब में उसके सामने नंगा खड़ा था।

फिर जैसे ही उसकी आँखें मेरे लंड पर पड़ी तो वो 5 सेकेंड तक देखती ही रह गयी। फिर जब उसे होश आया तो वो शर्माकर भाग गयी। अब में भी डोर बंद करके बाथरूम में घुस गया था और फ्रेश होने के बाद उसे सी.डी देने के लिए गया। फिर फ्लेट का डोर उसी ने खोला और अब वो मेरी आँख से आँख नहीं मिला पा रही थी। फिर मैंने उसे सी.डी दी और वापस आ गया। फिर दूसरे दिन रविवार था और बैंक बंद था। अब में लुंगी में था और टी.वी देख रहा था। तो तभी डोरबेल बजी तो मैंने डोर खोला, तो वो खड़ी थी, उसने ब्लू जीन्स और टॉप पहना था और वो बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर उसने मुझसे कहा कि उनका सी.डी प्लेयर खराब हो गया है इसलिए उसके पापा ने कहा कि मेरे सी.डी प्लेयर पर ही मूवी देख ले। फिर मैंने उसे अंदर बुलाया और डोर बंद कर दिया।

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फिर मैंने उसे सोफे पर बैठने को कहा और सी.डी लगाने लगा। फिर जब मूवी शुरू हो गयी, तो में किचन में चाय बनाने चला गया। अब रश्मि के बूब्स से मेरे लंड पर असर हो रहा था, जो मेरी लुंगी से साफ पता चल रहा था। फिर मैंने किचन से उसे देखा, तो मैंने नोटीस किया कि उसका ध्यान टी.वी पर कम और मेरी तरफ ही ज़्यादा था। फिर जब में चाय लेकर उसके पास आया, तो वो चोर नजरों से मेरे लंड को ही देख रही थी। फिर मैंने उसे चाय दी और उसके बगल में बैठ गया। अब उसका चेहरा लाल था और उसके बूब्स साँस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघो पर रखा, तो वो हड़बड़ा गयी और थोड़ी सी दूसरी तरफ सरक गयी। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रखा और हल्का सा दबा दिया तो उसके मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गयी।

फिर मैंने अपना कप टेबल पर रखा और उससे सट गया। फिर मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसकी आँखों पर किस किया, तो वो कुछ नहीं बोली, तो में समझ गया कि अब उसे भी अच्छा लग रहा है। फिर उसने भी अपना कप टेबल पर रख दिया और अपना एक हाथ मेरी जांघो पर रख दिया। फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और मेरी जांघ से हटाकर अपने लंड पर रख दिया। तो वो अपने हाथ को हटाने लगी, तो मैंने 5 सेकेंड तक उसका हाथ हटाने नहीं दिया। फिर मैंने देखा कि वो अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ रही है, तो फिर मैंने अपने लिप्स को उसके लिप्स पर रख दिया और उसके लिप्स को चूसने लगा। क्या बताऊँ? उसके लिप्स इतने सॉफ्ट थे कि में पागल हो गया था। फिर मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए और दबाने लगा। अब वो भी मस्ती में थी और मुझसे लिपट गयी थी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मैंने उसे वही सोफे पर लेटा दिया और उसके बूब्स को उसके टॉप के ऊपर से ही चूसने लगा। फिर मैंने उसके टॉप को ऊपर उठाया, उसने ब्लेक ब्रा पहनी हुई थी। अब में उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा था और वो अपने हाथ से सोफे को पकड़ रही थी। फिर मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और फिर जैसे ही उसकी ब्रा हटी, तो में पागल हो गया, इतने सुंदर बूब्स थे। अब मैंने उसके निपल को अपने मुँह में भर लिया था और चूसने लगा था और उसके दूसरे निप्पल को मसलने लगा था। अब वो भी मस्ती में आ गयी थी और मेरे सिर को ज़ोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी थी। फिर कुछ देर के बाद में अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी जीन्स को खोलने लगा, लेकिन वो नहीं-नहीं करने लगी थी। मैंने फिर से उसके लिप्स को अपने लिप्स में लिया और चूसने लगा। फिर मैंने उसकी जीन्स का हुक खोला और उसकी जीन्स नीचे करने लगा, तो उसने भी अपने चूतड़ उठाकर मेरा साथ दिया। फिर मैंने देखा कि उसने पेंटी नहीं पहनी है, उसकी चूत पर ब्राउन कलर के बाल थे और अब मेरा लंड पागल हो रहा था। फिर में अपनी एक उंगली उसके चूत के दाने पर ले गया और हल्का-हल्का रगड़ने लगा। अब वो मदहोश होकर अपने चूतड़ उठा रही थी और उसका चेहरा गुलाबी हो गया था।

फिर मैंने अपनी लंबी उंगली उसकी चूत में घुसाई तो मैंने पाया कि वो पूरी तरह से गीली हो गयी थी। फिर में खड़ा हो गया और अपने कपड़े खोलने लगा। फिर जब उसने मेरा 7 इंच लम्बा लंड देखा, तो वो बोली कि शी इज वर्जिन और मुझे कुछ भी करने से मना करने लगी। तो मैंने कहा कि उसे डरने की जरूरत नहीं है, में अंदर नहीं डालूँगा। फिर में दूससे रूम में गया और वैसलीन की डिब्बी ले आया। फिर मैंने उसकी चूत और अपने लंड पर वैसलीन लगा दी और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा और एक हाथ से अपने लंड को उसकी चूत पर रखा, तो जरा सा दबाने पर मेरा लंड 1 इंच उसकी चूत में घुस गया, तो उसे हल्का सा दर्द हुआ, तो में उसके ऊपर लेट गया और उससे कहा कि बस इतना ही दर्द होगा और फिर उसके होंठो को चूसने लगा। अब वो भी मुझसे लिपट गयी थी और अपने चूतड़ों को हिलाने लगी थी। फिर जब मैंने देखा कि वो मस्ती में है तो मैंने हल्का सा धक्का मारा तो मेरा लंड 2 इंच और अंदर चला गया।

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अब वो मुझे धक्का देने लगी थी, तो में उसके लिप्स को ज़ोर से चूसने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा। अब 2-3 मिनट के बाद वो भी आराम से थी, तो मैंने फिर से एक धक्का मारा तो मेरा लगभग पूरा लंड उसकी चूत के अंदर था। अब उसके मुँह से आवाज निकलने वाली थी कि मैंने अपने लिप्स से उसकी आवाज निकलने नहीं दी। अब उसकी आँखों में आँसू आ गये थे और 2-3 मिनट तक वो मुझे हटाने की कोशिश करती रही। अब वैसलीन और उसकी चूत गीली होने की वजह से मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर होने लगा था। फिर 5 मिनट के बाद वो भी अपने चूतड़ हिलाने लगी और मेरा साथ देने लगी। अब उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था और अब वो मेरे लिप्स चूस रही थी।

फिर कुछ समय तक ऐसा ही चलता रहा और अब हम दोनों ही मस्ती में थे। अब उसे बहुत मज़ा आया था और फिर जब मुझे लगा कि मेरा गिरने वाला है तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और अपनी लुंगी में गिरा लिया। अब मेरे लंड पर हल्का सा खून लगा हुआ था। फिर मैंने उसे लेटे रहने को कहा और रुई लेकर आया और उसकी चूत को साफ किया। फिर मैंने उसको कपड़े पहनाए और उसको चाय दी। फिर वो मुझसे बोलने लगी कि क्या सब ठीक रहेगा? तो मैंने उससे बोला कि सब ठीक है। फिर उसने मुझे किस दी और में उसको डोर तक छोड़ने के लिए उठा। अब उसे चलने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन फिर भी वो बहुत खुश थी। फिर अगले दिन वो लोग कानपुर चले गये और जाते-जाते उसने मुझे मौका पाकर किस दी और कहा कि अब सब ठीक है ।।

धन्यवाद …