दूध की चाय

हेलो दोस्तो !

मैं अरुण गुजरात से, 20 साल का हूँ और मैं अपना पहला सेक्स अनुभव आपको बता रहा हूँ। Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

मेरे परिवार में मैं, मेरे बड़े भाई, भाभी जिनकी अभी शादी के सिर्फ दो साल हुए हैं, उनका एक बेटा है, मेरी बहन सोनल 18 साल की है और मेरे पापा जो काम से हमेशा बाहर ही रहते हैं।

मेरी भाभी पिंकी, जिनकी उम्र मुझसे ज्यादा नहीं है, काफी मस्त और चंचल दिखती है और सोनल उससे भी ज्यादा खूबसूरत लगती है।

दोनों के साथ सेक्स करने का मुझे हमेशा ख्याल आता था पर डरता था।

गर्मी का मौसम था, भाई ऑफिस गए हुए थे और बहन स्कूल में !

मेरी भाभी औए मैं घर में थे, मैं कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा था कि तभी भाभी ने आवाज लगाई, बोली- रोहित, जा दूध ले आ।

मैं दूध लेन चला गया। थोड़ी देर बाद आकर बोला- भाभी, दूध ख़त्म हो गया है, नहीं मिला।

भाभी बोली- ओह, मुझे चाय बनानी थी ! ठीक है, कोई बात नहीं।

फिर मैं कंप्यूटर पर अपना काम करने चला गया।

थोड़ी देर बाद भाभी आई और बोली- लो चाय पी लो।

चाय देख कर मैं चौक गया, चाय दूध वाली थी, मैंने पूछा- भाभी दूध पहले से था क्या?

भाभी बोली- नहीं।

मैं बोला- फिर दूध वाली चाय?

भाभी : बस दूध मिल गया।

मैंने समझ नहीं पाया और मैं जोर देकर पूछने लगा तो भाभी बोली- किसी को बोलेगा तो नहीं?

मैंने : नहीं भाभी, आप बोलो तो।

भाभी : अरे मैं औरत हूँ, मेरे पास हमेशा दूध रहता है।

मैं : मतलब?

भाभी : औरत अपने बच्चे को दूध कहाँ से पिलाती है?

मैं : भाभी आप मुझे अपना दूध पिला रही हो, मैं नहीं पिऊँगा।

भाभी : क्यों स्वाद अच्छा नहीं है क्या? तुम्हारे भैया तो कहते हैं कि बहुत मीठा है। और मैंने तो कई बार इस दूध से चाय बनाई है।

मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ।

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भाभी : क्या हुआ? शरमा गए?

मैं : भाभी यह आप अच्छा नहीं करती हो।

भाभी : हाँ और तुम तो बड़ा अच्छा काम करते हो हमेशा मेरा पैंटी बर्बाद करके क्या?

मैं : मतलब?

भाभी : भोले मत बनो, मैंने खुद तुम्हें देखा है कि मेरी पैंटी को सूंघ कर मुठ मारते हो और फिर मेरी पैंटी पर ही अपना वीर्य गिरा देते हो।

मैं शर्म के मारे पानी पानी हो गया, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूँ।

भाभी : क्या हुआ? मैं सब जानती हूँ कि तुम हमेशा मेरे बारे में सोचते रहते हो। बोलो, क्या मैं गलत बोल रही हूँ?

मैंने कुछ जवाब नहीं दिया, लेकिन भाभी पूरी खुल गई थी।

भाभी : अरे डरते क्यों हो? जिस तरह तुम मुझे देख कर पागल हो गए हो उसी तरह मैंने जब से तुम्हारा लण्ड देखा है तब से सिर्फ तुम्हारे बारे मैं ही सोचती हूँ।

यह सुन कर तो मानो मुझ में एक नया जोश आ गया और झट से भाभी का हाथ पकड़ कर बोला- भाभी, मैं सच में आपको देख कर पागल हो गया हूँ, मुझे सिर्फ एक मौका दीजिये।

भाभी : ठीक है ! पर किसी को पता नहीं चलना चाहिए।

मैंने भाभी को बाहों में भर लिया और कहा- नहीं पता चलेगा !

फिर मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और पाँच मिनट तक चुम्बन करता रहा।

फिर मैंने उनके गालों पर और इधर उधर चूमना शुरु किया और अपना हाथ उनकी चूची पर रख दिया और जोर से मसलता रहा।

भाभी भी इस सब में मेरा पूरा साथ दे रही थी और पूरा मजा ले रही थी कि तभी दरवाजे की घण्टी बज गई। हम तुरंत अलग हुए, मैं दरवाजा खोलने गया तो देखा कि सोनल आई हि और अब मैं और भाभी यही सोचते रहे कि कब हमें मौका मिलेगा।

शाम को भैया आये और आते ही बोले- मुझे ऑफिस के काम से बंगलोर जाना है, 4-5 दिन में लौट आऊँगा।

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यह सुन कर तो मन ही मन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

फिर लगभग दस बजे मैं भैया को एअरपोर्ट छोड़ आया, खाना तो भैया के साथ ही खा लिया था सो सीधा हम सब सोने चले गए।

पर मुझे नींद कहाँ आ रही थी, मेरा मन तो कर रहा था कि भाभी के कमरे में चला जाऊँ, पर हिम्मत ही नहीं हो रही थी, कहीं सोनल न देख ले !

तभी मैं मुठ मारने बाथरूम में जाने लगा। बाथरूम के दरवाजे का लोक ख़राब था इसलिए वो हमेशा खुला ही रहता था, मैंने दरवाजा खोला और अन्दर का नजारा देख कर मैं पागल हो गया।

अन्दर सोनल एक अजीब टाइप की लकड़ी लेकर अपने चूत में अन्दर-बाहर कर रही थी।

उसकी आँखें बंद थी इसीलिए उसे पता भी नहीं चला कि मैं उसे देख रहा हूँ।

यह दृश्य देख कर मेरा लण्ड तन कर मेरी लुंगी से बाहर आने को बेताब होने लगा।

इतने में सोनल की आँख खुली और मुझे सामने देख कर चौंक गई। मैंने झट से बिना कुछ पूछे उसे बाहों में भर कर कहा- सोनल, आज मुझे रोकना मत !

और यह कह कर उसके होंठों पर चुम्बन करने लगा और एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा।

कुँवारी चूची होने के कारण वो पिंकी के मुकाबले काफी सख्त थी। सोनल ने भी अपने को छुड़ाने की कोशिश नहीं की और मेरा साथ देने लगी।

फिर मैंने उसके शर्ट को उतार दिया, वो सिर्फ ब्रा में थी।

उसे अपनी पैंट और पैंटी पहले से उतारी हुई थी।

फिर मैंने उसे वहीं बाथरूम में लिटाया और उसकी चूची चूसने लगा।

फिर मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा और हाथ से सहलाता रहा। उसे काफी मजा रहा था।

फिर मैंने अपनी बनियान उतारी और अपनी लुंगी खोल दी और उसे लण्ड चूसने को कहा।

पहले तो वो मना कर रही थी पर मेरे जिद करने पर वो मान गई।

लण्ड चुसवाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने उसकी टाँगों के बीच में बैठ कर अपने हाथों से उसकी चूत को सहलाया और उसे चाटने लगा। उसे भी अपनी चूत चटवाना बहुत अच्छा लग रहा था।

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फिर मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा।

वो झट से घोड़ी बन गई। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और बोला- सोनल, क्या पहले कभी चुदवाई है?

सोनल : नहीं भैया, मैं पहली बार आपसे ही चुदवा रही हूँ।

मैंने कहा- तो ठीक है ! अब मैं तुम्हारी चूत में अपना लण्ड घुसाने जा रहा हूँ। शुरु में थोड़ा दर्द होगा पर सह लेना।

फिर मैंने धीरे धीरे घुसाना शुरु किया और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा, मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया। वो बुरी तरह चीख उठी, मैं डर गया।

मैंने उसे सीधा किया और उस पर लेट गया और उसके मुँह पर अपना मुँह रख कर उसका मुँह बंद किया।

फिर मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा। वो पूरे ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी पर नहीं चीख पाई।

मैंने इसकी परवाह किये बिना कई धक्के लगा दिए।

अब मेरा लण्ड आराम से अंदर-बाहर होने लगा और सोनल का भी दर्द कम हो गया, उसे भी मजा आने लगा।

फिर मैं लगभग दस मिनट ऐसे चोदता रहा और उसके बाद हम दोनों झड़ गए।

थोड़ी देर हम एक दूसरे से लिपट कर लेटे रहे फिर वो बोली- भैया, आज मुझे बहुत मजा आया ! आप मुझे रोज़ चोदना।

मैंने कहा- क्यों नहीं ! अब मैं तुझे रोज चोदूँगा और ज्यादा अच्छे से चोदूंगा। आज पहली बार था ना इसलिए आज इतना ही।

फिर उसने उठने की कोशिश की पर उठ नहीं पाई। मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था, फिर भी मैंने उसे नंगा ही उठाया और उसके कमरे में पहुँचा कर अपने कमरे में आ गया।

आगे की कहानी फिर कभी क कैसे मैंने अपनी भाभी को ठोका और ग्रुप सेक्स भी किया।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताइएगा।