माँ की बड़ी गांड की सेवा

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna यह एक दिन की बात है, में ऑफिस से लेट आया था। अब में रोज की तरह नहाने वाला था। तो तभी माँ ने आवाज़ दी और बोली कि तेरे नहाने का पानी तैयार है। फिर में बाथरूम में गया तो तभी माँ को याद आया कि उसने मुझे बहुत ही गर्म पानी दिया है। तो तब माँ बोली कि अरे थोड़ी देर रुक, में तुझे ठंडा पानी परोसती हूँ। जब मेरी माँ ने साड़ी पहनी थी, नॉर्मली महाराष्ट्र की औरतें साड़ी ही पहनती है। मेरा बाथरूम बहुत छोटा है, वो दो लोगों से ही भर जाता है। अब में अंदर था और अब माँ बाथरूम में आ गई थी। अब में चड्डी में था, लेकिन मैंने माँ आने वाली थी इसलिए टावल भी पहन रखा था। फिर माँ अंदर आई, अब में माँ के पीछे खड़ा था। फिर माँ मेरे सामने झुकी और अब उसका मुँह उस तरफ था और उसकी गांड मेरी तरफ थी। अब वो मेरे लिए पानी परोस रही थी और ठंडा पानी गर्म पानी में डाल रही थी। फिर तभी उसकी गांड मेरे लंड को लगी तो मुझे थोड़ी शर्म आई इसलिए में थोड़ा पीछे आ गया, लेकिन वो फिर से थोड़ी पीछे आई और अब उसकी गांड मेरे लंड को लगने लगी थी।

अब मेरा लंड 180 डिग्री खड़ा था, क्योंकि में हमेशा ऑफिस में सुंदर लड़कियाँ देखकर उनकी याद में बाथरूम में मेरा लंड हिलाता था। फिर माँ ने पानी परोसा और वो बाहर चली गई, तो जाते-जाते उसने मेरी तरफ देखा और स्माइल दी। फिर कुछ दिन तक ऐसा ही होता रहा। अब माँ हमेशा किसी ना किसी बहाने से बाथरूम में आती थी और हमेशा वो उनकी गांड को मेरे लंड को लगाने की कोशिश करती थी। अब में भी समझ गया था, शायद माँ को मेरा लंड टच होना अच्छा लगता है। फिर एक दिन में बाथरूम में था, तो तभी माँ फिर से अंदर आई। अब मैंने मेरे ऊपर पानी डाला ही था, अब में भीगा हुआ था। तो तभी माँ बोली कि अरे ये गर्म पानी ले, तो में उठकर खड़ा हुआ।

फिर माँ हमेशा की तरह आगे आई और झुकी तो उसकी गांड फिर से मेरे लंड को लगने लगी। तो इस बार मैंने सोचा कि में टावल नहीं पहनूँगा, अब में वैसे ही चुड्डी में खड़ा था और फिर में जानबूझकर थोड़ा आगे आया और मैंने मेरा लंड माँ की गांड से टच किया। तो वो भी पीछे आई और उसकी गांड मेरे लंड से टच करने लगी थी। अब में जब भी खाना खाने बैठता था, तो तब माँ मुझे परोसती थी। अब हम दोनों ही रोज रात को अकेले होते थे। वो हमेशा रात को पारदर्शी साड़ी पहनती थी, ताकि में उसके बूब्स देख सकूँ। अब जब भी वो मुझे खाना परोसती थी तो तब मुझे उसके बूब्स आसानी से देखने को मिलते थे, कभी-कभी साड़ी का पल्लू अगर टाईट रहेगा, तो वो उसे फिर से ढीला करके अपनी साड़ी ऐसे करती थी कि मुझे उसके बूब्स दिखाई दे। फिर उस रात खाना ख़ाने के बाद माँ ने कहा कि तू मेरे साथ ही सो जा और फिर हम दोनों सोने चले गये। अब में माँ के बाजू में ही सोया था।

फिर 1 घंटे के बाद मैंने मेरा एक हाथ माँ के ऊपर रख दिया। मैंने माँ की कमर पर मेरा एक हाथ रखा था। अब माँ का मुँह उस तरफ था। फिर में थोड़ा आगे गया और माँ से और ज्यादा चिपक गया। अब मेरा लंड माँ की गांड को टच करने लगा था। फिर धीरे-धीरे मैंने मेरा एक हाथ माँ के बूब्स पर रखा और उन्हें सहलाने लगा था। मुझे लगा कि माँ सो गई है, लेकिन वो सोने का नाटक कर रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे मेरा एक हाथ माँ के पेट से घुमाकर माँ की साड़ी में डाला तो तब अचानक से माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली कि क्या कर रहा है तू? और फिर वो सीधी हो गई। अब में बहुत घबरा गया था, लेकिन माँ बोली कि अब तू जवान हो गया है, चल तेरी शादी करेंगे, कोई लड़की देखी है कि नहीं अपने ऑफिस में? तो बता तेरी शादी करेंगे या किसी के साथ कुछ किया है क्या? तो तब में बोला कि क्या किया है? तो तब माँ बोली कि क्या अब वो भी बताऊँ कि जवान लड़के इस उम्र में क्या करते है? तो मैंने बोला कि में अनुभव लिए बगैर शादी नहीं करूँगा, मैंने तो अभी तक कुछ भी अनुभव नहीं लिया है। तो तब माँ बोली कि अनुभव कौन सी बड़ी चीज है? आ में तुझे सिखाती हूँ। जब उजाला कम था तो मुझे थोड़ा सा ही दिख रहा था।

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फिर माँ ने कहा कि चल अब अपने कपड़े उतार। फिर मैंने तुरंत अपने कपड़े उतारे और बोला कि अब। तो तब माँ ने कहा कि आ अब मेरे ऊपर चढ़ जा। फिर में माँ के ऊपर चढ़ गया। फिर माँ ने अपनी साड़ी ऊपर की और अपनी पेंटी निकाली और मेरा लंड अपने एक हाथ में पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और बोली कि चल अब मुझे झटके दे। फिर मैंने माँ को झटके देना चालू किया। अब में इतना उत्तेजित था कि मेरा लंड ना पूरा जाता था और ना में ठीक से झटके दे पा रहा था और फिर उसी वक़्त मस्ती की वजह से मेरा पानी माँ की चूत में गिरने की वजह से माँ की चूत पर यानि बाहर ही गिर गया था। फिर में उठा और अब में बहुत निराश था। तो तभी माँ ने कहा कि कोई बात नहीं अगली बार तू जरूर अच्छा करेगा, आज तेरा पहली बार है, में सिखाऊँगी तुझे, लेकिन एक बात याद रखना आज बुधवार है और शनिवार को तो खुद करेगा, में नहीं बताऊँगी। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर बुधवार से शुक्रवार रात तक तो वो मुझे सिखाती रही और फिर अगले दिन शनिवार आया। अब हम नीचे के रूम में सो गये थे। फिर मैंने माँ के माथे पर किस किया धीरे-धीरे माँ के गालों पर, माँ के होंठो पर, माँ की गर्दन पर और फिर धीरे-धीरे में नीचे आया और माँ का ब्लाउज खोला और उसके बूब्स को चूसने लगा, चाटने लगा और काटने लगा था। फिर मैंने मेरा एक हाथ माँ की साड़ी में डाला और माँ की पेंटी में अपना एक हाथ डालकर माँ की चूत तक ले गया और माँ की चूत में अपनी एक उंगली डालकर उसे सहलाने लगा था। अब माँ को भी अच्छा लग रहा था। अब उसकी आवाज़े निकल रही थी हाईईईई, और करो, आह। अब उसकी सांसे बढ़ने लगी थी और उसकी आवाज़े भी ऊममाहह, आह माँ, हाईईई, उूउउ और फिर अचानक से वो बोली कि अब तो डाल ना, आह, हाईईईईईईई, लेकिन में नहीं मान रहा था।

अब में वही कर रहा था तो तभी अचानक से मेरा ध्यान सीढ़ियों पर गया और बोला कि चल हम ऊपर के कमरे में करेंगे। फिर’ तब माँ भी हाँ बोली। फिर हम उठे और माँ ऊपर गई और बोली कि तू नीचे ही रुकना और जब तक में ना बोलूं, तब तक ऊपर मत आना। फिर मैंने नीचे ही मेरे कपड़े उतारे और अब में टावल में ही था और माँ के बुलाने का इंतज़ार कर रहा था। फिर तभी थोड़ी देर के बाद माँ ने आवाज दी। तो में ऊपर गया तो मैंने देखा कि माँ एक कोने में दीवार से चिपककर खड़ी थी, उसका मुँह उस तरफ था, उसने उसके बूब्स पर टावल और नीचे कमर पर यानि नाभि के भी नीचे टावल पहना था। फिर में माँ के पास गया, तो माँ ने मेरी तरफ देखा। उस वक़्त माँ एक कामदेवी लग रही थी। फिर में माँ के पास गया और उसको चूमने लगा और चाटने लगा था। फिर में चूमते-चूमते नीचे आया और माँ की नाभि चाटने लगा और फिर में फिर से खड़ा हुआ और माँ के बूब्स दबाने लगा था।

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अब में अपना एक हाथ माँ के नीचे टावल में डालकर माँ की चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा था। अब मैंने पहले एक और बाद में दो और फिर तीन उंगलियाँ माँ की चूत में डाल दी थी। अब माँ उूउउईईई, आह, बस कर, अब धक्के लगाओ मुझे, अब रहा नहीं जाता, आह, हाईईईईईईई ऐसे बोले जा रही थी, लेकिन में नहीं मान रहा था। अब माँ की चूत में से पानी निकल रहा था। अब माँ और भी तड़पने लगी थी और बोली कि अब लगा भी दे रे। फिर तभी मैंने माँ से पूछा माँ क्या में आपको नाम से पुकार सकता हूँ? तो तब माँ बोली कि हाँ तू मुझे नाम से पुकार सकता है और में तुझे इज्जत देकर पुकारुगी (जैसे एक औरत अपने पति को पुकारती है वैसे) जैसे कि में जब माँ के बूब्स दबाता था और उसकी चूत में उंगलियाँ डालता था। तो तब माँ बोलती थी कि अजी अब बस भी कीजिए, आप मुझे ऐसे मत तरसाओं, अब डाल भी दो और कितना तरसाओगे जी? क्या मेरी चूत का पानी पूरा ही निकालोगे? मेरी हाईट 6 फुट और माँ की हाईट 4 फुट 9 इंच है।

अब हम खड़े-खड़े ठीक से कर नहीं सकते थे। फिर तभी मेरा ध्यान एक कोने में गया और उस कोने में पलंग रखा था। फिर में माँ को वहाँ लेकर गया और बोला कि पुष्पा चल पलंग पर चढ़ जा। तो माँ पलंग पर चढ़ गई। फिर में माँ को पलंग के एक कोने में लेकर गया और उसके दोनों हाथ दीवार पर रखने को बोला और पलंग पर घुटने के बल बैठने बोला। अब माँ का मुँह उस तरफ और माँ की गांड मेरी तरफ थी। अब हम घर के एक कोने में पलंग के ऊपर थे। माँ ने अभी भी अपने बूब्स पर और नीचे टावल पहना था और मैंने भी टावल पहना था। फिर में भी माँ के पीछे अपने घुटनों के बल बैठ गया। तो तभी माँ बोली कि आप क्या सोच रहे हो? अब में माँ की गांड पर अपने हाथ घुमा रहा था, उसे सहला रहा था और बोला कि पुष्पा आज में तेरी गांड मारूँगा। तब माँ बोली कि हाँ जी, लेकिन थोड़ा धीरे से नहीं तो आपकी बड़ी तलवार से मेरी गांड फट जाएगी।

फिर मैंने माँ का नीचे का टावल ऊपर किया और मेरा लंड बाहर निकाला और माँ की गांड के छेद पर रखकर झटका देने लगा, लेकिन वो नहीं जा रहा था। तब माँ बोली कि अजी आप तेल लगाओ और फिर करो। तो तब में नीचे के रूम में गया और तेल लेकर आया और थोड़ा तेल मेरे लंड पर लगाया और थोडा तेल माँ की गांड में भी डाला, मैंने इतना तेल डाला था कि माँ की गांड पूरी तेल से भर गई थी। फिर में बोला कि पुष्पा मेरी जान अब तैयार हो जा। तो तब माँ बोली कि प्लीज थोड़ा धीरे, नहीं तो मेरी गांड फट जाएगी, मुझे डर लग रहा है आपका। तभी मैंने ज़ोर से एक झटका दिया। तो तभी माँ चिल्लाई ऊऊ, आआ, निकाल ले, लेकिन में नहीं माना और ज़ोर जोर से झटके देने लगा। लेकिन पहले ही झटके से मेरा लंड माँ की गांड में आधा घुस गया था। फिर तब माँ चिल्लाई हाईई, ये तेरे लंड का टोपा बड़ा ही मोटा है, हाईईईईई, साले निकाल ले, निकाल नहीं तो मेरी गांड फट जाएगी, हाईईईईईईईईई। फिर तभी मैंने अपने झटके और ज़ोर से मारे और बोला कि पुष्पा क्या बोला तूने? और तभी माँ को समझाया मैंने तेरी बजाई तो तू बोली।

फिर तभी माँ बोली कि मुझे माफ करना, मुझसे गलती हो गई, मैंने आपको तू बोला, आह, प्लीज, लेकिन थोड़ा धीरे करो, एक तो आपकी हाईट 6 फुट है और आपका लंड 7 इंच लम्बा है, मेरी हाईट तो 4 फुट 5 इंच है, आआआ, प्लीज थोड़ा धीरे, मेरी गांड फट जाएगी। अब बाहर तूफ़ानी बारिश हो रही थी और में अंदर तूफान बन गया था। अब में ज़ोर-जोर से झटके दे रहा था और माँ चिल्ला रही थी एयाया, उुआअ, प्लीज, ससस्स, धीरे में मर गई, आआ और धीरे, हाईई, धीरे, लेकिन मेरे झटके बढ़ते गये और अब मेरा लंड आधे से भी ज्यादा माँ की गांड में घुस गया था। फिर मैंने थोड़ी देर के बाद अपने झटके थोड़े धीरे किए। तो तब माँ ने कहा कि क्या हुआ? रुक क्यों गये? तो तब में बोला तुझे तकलीफ़ हो रही है ना। फिर तब माँ ने कहा कि लेकिन मुझे मज़ा आ रहा है। मैंने फिर से अपने झटके देने शुरू कर दिए तो माँ फिर से चिल्लाने लगी।

Antarvasna Hindi Sex Story  शादी में भाभी को घोड़ी बनाकर चोदा

अब मेरा लंड माँ की गांड में पूरा घुसने लगा था। माँ फिर से चिल्लाने लगी, अब डाल दे, मेरी जान एयाया, निकल रही है, उउउ माँ, अब में और नहीं सह सकती, हाईईई, आआओउ। फिर तभी मैंने माँ को ज़ोर से पकड़ा और ज़ोर का आखरी झटका मारा तो तभी मेरा सफेद पानी माँ की गांड में अंदर चला गया। तब माँ बोली कि क्या गर्मी है तेरी? बहुत अच्छा लग रहा है, एमम, एयाया, तेरा तो बहुत ही पानी निकला है, आह और फिर थोड़ी देर के बाद हम वैसे ही सो गये। फिर 1-2 घंटे के बाद माँ की नींद खुली। अब में सोया था तो तभी एक हाथ मेरी चड्डी में जा रहा है, ऐसा मुझे महसूस हुआ था। तो मैंने हल्की सी मेरी आँखें खोली तो मैंने देखा कि माँ का एक हाथ मेरी चड्डी में था, तो तभी में उठा। तो तब माँ बोली कि अपने आपको शांत किया, लेकिन मुझे कब शांति दोगे? चलो अब में जैसे बोलती हूँ वैसा करो, मेरी चूत को शांत करो।

फिर में उठा और माँ को फिर से चाटने लगा और उसकी चूत में उंगली डालने लगा था। अब वो सिसकियाँ लेने लगी और बोली कि एयाया, उउउंम, कितना सताएगा? एयाया, उूउउ, एमम, अरे मेरी चूत का पूरा पानी खत्म करेगा क्या? तो तब में उठा और माँ के दोनों पैर मेरे कंधो पर रख लिए और उसे सीधा सोने को बोला। फिर मैंने मेरा लंड बाहर निकाला और फिर से माँ की चूत पर लगाया और ज़ोर से एक झटका दिया। फिर तभी माँ जोर से चिल्लाई आआ, हाईई माँ, आपका बहुत बड़ा है। अब धीरे-धीरे मेरे झटके और बढ़ने लगे थे और माँ जोर-जोर से चिल्लाती रही आह्ह्ह बहुत तकलीफ हो रही है, लेकिन अच्छा भी लग रहा है, हाईईईई, हाईईईईई, सस्स। अब वो भी नीचे से उसकी कमर हिला-हिलाकर मेरा साथ दे रही थी। फिर’ तभी मैंने ज़ोर से एक झटका मारा और अब में और जोर-जोर से झटके मारने लगा था। फिर तभी माँ ने कहा कि अपनी दोनों बहनों को भी चोद देना।

अब में जोर-जोर से झटके दे रहा था और बोला कि पापा नहीं करते है क्या? तो तभी माँ बोली कि तेरे पापा रात को आते ही नहीं है, कहाँ होते है जानता है? तो मैंने कहा कि कहाँ? तो तब माँ ने कहा कि वो लेडिस बार में जाते है, आह मार मुझे और ज़ोर के झटके दे और मुझे शांति दे, में घर में अकेली रहकर थक गई हूँ, आमम, आआआआआ। अब मुझे यह सब सुनकर शॉक लगा था। अब में जोर-जोर से झटके दे रहा था और फिर हर बार की तरह मैंने एक अपना आखरी झटका दिया और मेरा पानी माँ की चूत में ही गिरा दिया। फिर तब माँ बोली कि आआ अब ठीक लग रहा है, हाईईईईई, आह, आज ही तुझे सिखाया और तू तो आज ही फर्स्ट क्लास मारी, आज से तेरे पापा को जाने दे, आज से हर रात तू और में खूब मजे करेंगे, आज से आप ही मेरे पति हो और में आपकी पुष्पा, आह सालों के बाद आज मुझे तृप्ति मिली है और फिर हम एक दूसरे से चिपककर सो गये ।।

धन्यवाद …