दीदी की प्यासी चूत का गर्म पानी

हैल्लो दोस्तों Antarvasna मेरा नाम संजय है, में बरीपदा उड़ीसा का रहने वाला हूँ। में 20 साल का बी.एस.सी स्टूडेंट हूँ। यह मेरी और मेरी दीदी की रियल स्टोरी है। यह एक दिन का बात है, तब में 10 वीं क्लास में पढ़ता था और मेरी बहन कॉलेज में पढ़ती थी, वो बहुत खूबसूरत थी। दोस्तो आप लोगों को उसके फिगर के बारे में क्या बताऊं? उसका फिगर साईज 33-26-34 था, वो हमेशा सलवार पहनती थी इसलिए वो और भी सेक्सी लगती थी, वो हमेशा मेरे करीब रहती थी और मुझे देखकर शरमा जाती थी।

फिर एक दिन में स्कूल से आने के समय बारिश के कारण भीग गया था। फिर जब में घर पहुँचा तो मुझे सर्दी लग गयी थी। फिर मम्मी ने मुझे जल्दी से ड्रेस चेंज करने के लिए कहा तो मैंने ड्रेस चेंज किया और नाश्ता करके टी.वी देखने चला गया। फिर शाम को मम्मी और पापा उनके दोस्त के घर एक पार्टी अटेंड करने चले गये और मेरे दीदी को गर्म तेल से मेरे पैर को मालिश करने के लिए कहे गये, क्योंकि मुझे सर्दी लग गयी थी। फिर कुछ देर के बाद दीदी गर्म तेल लेकर आई और कहने लगी कि छोटू तेरे पैर दिखा, तेरी मालिश कर दूँ। तब मैंने अपने पैर दिखा दिए। फिर दीदी ने मालिश शुरू कर दी। अब जब वो मालिश कर रही थी, तो तब मेरी नजर उनके बड़े-बड़े बूब्स पर थी, जो वो उनके थोड़े हिलने पर मचल उठते थे।

फिर कुछ देर के बाद मालिश करते-करते मेरा हाथ अचानक से उनके बूब्स पर चला गया तो वो शर्माकर उठकर अपने रूम में चली गयी। फिर रात को करीब 1 बजे में धीरे से अपने बिस्तर पर से उठा और दीदी के बेड के पास नीचे जमीन पर बैठ गया। फिर मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा वो सो रही थी। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके गालों पर रखा और सहलाने लगा। अब मुझे डर भी लग रहा था, लेकिन दीदी नहीं उठी। तब मैंने अपना एक हाथ बिस्तर के अंदर कर लिया। अब मुझे सर्दी भी बहुत लग रही थी, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था। फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसके बूब्स पर रखा और इंतज़ार करने लगा कि दीदी का क्या जवाब होता है? फिर में धीरे-धीरे से उसके बूब्स को दबाने लगा तो दीदी का कोई जवाब ना देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गयी थी और अब में दीदी के बूब्स को थोड़ा ज़ोर से दबाने लगा था, उसके बूब्स का साईज 36 था। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मुझे लगा कि दीदी जाग रही है।

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फिर मैंने अपने एक हाथ को उसके सलवार के अंदर घुसा दिया और उनकी ब्रा पर अपना हाथ रख दिया और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी ब्रा ऊपर कर दी। अब उसके बूब्स नंगे हो गये थे, तो में उन्हें दबाने लगा और फिर मैंने उनको चूसना शुरू कर दिया। अब दीदी भी बिल्कुल चुपचाप लेटी थी। अब में उसके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर में अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी टाँगो पर फैरने लगा। अब मैंने अपना हाथ उसकी पेंट में डाल दिया था और उसकी पेंटी से भी अंदर ले गया, वहाँ बहुत बाल थे और उसकी चूत गीली थी। अब मेरा हाथ गीला हो गया था। अब में उसकी चूत पर अपना एक हाथ फैरने लगा था। फिर में उसके होंठो को चूमने लगा। अब वो भी मेरे होंठो को चूम रही थी, लेकिन आँखे नहीं खोल रही थी। अब मुझे बहुत डर भी लग रहा था। तभी अचानक से दीदी उठी और कहने लगी कि अच्छा छोटू, तुझे तेरी दीदी को चोदना है तो ठीक है। फिर में घबरा गया और कुछ कह नहीं सका।

फिर कुछ देर के बाद मैंने दीदी को रूम से बाहर जाते देखा। अब में भी चुपचाप उसके पीछे रूम से बाहर निकल गया था। फिर वो सीधी बाथरूम में चली गयी। अब बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था और में बाहर ही खड़ा था। अब मैंने मन ही मन में सोच लिया था कि सेक्स के बारे में दोस्तों के साथ बहुत सुना था, लेकिन आज करने का मौका मिला है। फिर कुछ देर के बाद उसने दरवाजा खोला और वो जैसे ही दरवाजे से बाहर निकलने लगी तो में झट से उसे पुश करता हुआ बाथरूम में ले गया। फिर मैंने बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद करके में दीदी को ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा। वो कुछ नहीं बोली और सिर्फ़ आह, ऊऊऊ करने लगी थी। फिर मैंने उसके होंठो को चूमा और चाटा, गालों को चूमा और अपना हाथ उसके बूब्स पर फैरने लगा था। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने दीदी की सलवार उतार दी। अब मैंने उसकी ब्रा भी उठा दी थी और फिर मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतार दी। अब में उसके बूब्स से खेलने लगा था और उसके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। अब दीदी मेरे गालों को सहला रही थी। फिर मैंने उसका लोवर नीचे कर लिया और नीचे बैठकर उसके पैरो और जांघो पर किस करने लगा था। अब मेरे हाथ बहुत तेज़ी से चल रहे थे, मुझे लगा कि जैसे में आसमान में उड़ रहा हूँ। फिर मैंने खड़े होकर अपनी पेंट उतार दी। अब हम दोनों सिर्फ़ चड्डी में थे। फिर मैंने उसे ऊपर से लेकर नीचे तक खूब चूमा, चाटा। अब मेरा लंड बिल्कुल तैयार था। फिर मैंने उसकी पेंटी उतार दी, यह मेरा पहला अनुभव था, मैंने सेक्स के बारे में सिर्फ़ फिल्मो से सीखा था और शायद दीदी का भी पहला अनुभव था। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी, तो मेरी उंगली जैसे ही दीदी की चूत में गयी, तो वो सिसकियाँ लेने लगी। अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने अपनी उंगली से दीदी की चूत की खूब चुदाई की और करीब 5 मिनट के बाद दीदी झड़ गयी और में दीदी की चूत को चाट-चाटकर सब गर्म पानी पी गया।

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दोस्तों क्या स्वीट और खारा था वो पानी? फिर में अपना एक हाथ उसकी चूत पर फैरने लगा और लंड कहाँ जाता है, वो जगह अपनी उंगली से तलाश कर रहा था। अब मुझे वो जगह मिल गयी थी। अब उसकी चूत गीली हो गयी थी। अब वो मुझे ज़ोर से खुद से चिपकाने लगी थी। तब मुझे लगा कि अब हमें देर नहीं करनी चाहिए। फिर में अपनी चड्डी उतारकर अपना लंड उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा, लेकिन नाकामयाब हुआ, क्योंकि वो हाईट में मुझसे बड़ी थी और में टांगो को नीचे करके भी कोशिश कर रहा था, लेकिन में नहीं कर पा रहा था। फिर मैंने उसको बाथरूम के फर्श पर लेटा दिया। अब उसने अपनी आँखे बंद कर दी थी। फिर में उसके ऊपर आया और उसकी दोनों टांगे ऊपर करके अपना लंड उसकी चूत के छेद में डालने लगा, लेकिन मेरा लंड सही निशाने पर नहीं लग रहा था। फिर मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत में डालकर सही जगह देखी और अपना लंड उस जगह पर फिक्स करके थोड़ा सा धक्का दिया तो मेरा लंड अभी थोड़ा सा ही अंदर गया था कि वो चीखने लगी और मुझसे बोली कि निकालो इसे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तो में वहीं रुक गया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से पुश किया, तो वो धीरे से चिल्लाई आहह यह तो बहुत दर्द कर रहा है। अब में उसके बूब्स को दबाने लगा था और उसके निप्पल को चूमने लगा था। फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर करके एकदम से ज़ोर लगाया। तो वो बोली कि छोटू प्लीज इसे बाहर निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब में ऐसे ही लेटे-लेटे उसे प्यार करने लगा था। अब उसकी आँखों में से आँसू आने लगे थे। फिर मैंने थोड़ा सा अपना लंड बाहर निकाला और धीरे-धीरे अंदर करने लगा। अब वो तड़प रही थी। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत में और ज़्यादा अंदर कर लिया और उसके जवाब का इन्तजार करने लगा। तब मुझे लगा कि अब वो पहले से अच्छा महसूस कर रही है। फिर में अपनी कमर को जल्दी-जल्दी अंदर बाहर करने लगा, उसकी चूत बहुत टाईट थी। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। अब वो मेरा पूरा साथ दे रही थी और अपनी कमर हिलाने लगी थी।

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अब ऐसे करते-करते उसके मुँह से आवाजे निकलने लगी थी आअहह और जोर-जोर से करो, चोदो मुझे, आज इस प्यासी चूत की प्यास बुझा दो। अब में यह सब सुनकर और जोर-जोर से धक्का मारने लगा था। अब में करीब 20 मिनट तक अपनी कमर हिला-हिलाकर धक्का मार रहा था। अब दीदी दो बार झड़ चुकी थी। अब में भी अपना पानी छोड़ने वाला था। फिर मैंने दीदी से पूछा कि दीदी पानी कहाँ निकालूं? तब दीदी बोली कि तेरी दीदी की प्यासी चूत में ही छोड़ दे। फिर मैंने वहीं अपना सारा पानी छोड़ दिया और दीदी के ऊपर लेट गया। अब हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे। फिर 1 घंटे के बाद दीदी उठी और शॉवर चालू कर दिया। अब हम दोनों पानी में बैठ गये थे। अब दीदी मेरे लंड को फिर से सहलाने लगी थी और अपने मुँह में लेकर मुठ मारने लगी थी। फिर 10 मिनट के बाद मैंने उनके मुँह में ही अपना पानी छोड़ दिया तो वो मेरा पूरा का पूरा पानी पी गयी। फिर उसके बाद हम दोनों जाकर आपने बिस्तर पर लेट गये। फिर इस तरह से दीदी और में अगले कई दिनों तक जब भी हमारा मन करता था, हम दोनों सेक्स करते थे। अब दीदी की शादी हो गयी है और में अकेला अपना प्यासा लंड लेकर रह गया हूँ ।।

धन्यवाद …