पापा की मालिश

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आरजू है और आज तो में फिलहाल एक घमासान स्टोरी आप सबको बताती हूँ, जो कि एक अंकल की है। हाँ तो दोस्तों ये कहानी 45 साल के एक अंकल की है, जिनके एक 18 साल की लड़की और एक 21 साल लड़का का है और उनकी वाईफ बहुत ही खूबसूरत और सेक्स के मामले में हर तरह से वो अपनी वाईफ से खुश रहते थे। फिर एक दिन वो ब्लू फिल्म लाए, जिसमें 18 साल की लड़की बहुत अवाजों के साथ अपनी चूत में लंड डलवा रही थी। अब वो अपनी वाईफ के साथ बी.एफ देख रहे थे और उसके बाद उन दोनों ने चुदाई भी की, लेकिन अंकल यानि कि अब अमर के दिल में कहीं ना कहीं ये बात जम गयी थी कि किसी कम उम्र वाली की चूत मारी जाए, लेकिन किसकी? ये लाख टके का सवाल था और पहले उनके दिल में कामवाली बाई की लड़की को चोदने का ख्याल आया, लेकिन वो अभी बहुत छोटी थी यानि कि 12-13 साल की थी। तो तब ही आंटी का अपने मायके जाना हुआ और वो उनके लड़के को लेकर 5 दिन के लिए अपने मायके चली गयी। अब घर में सिर्फ़ अमर और रीमा (उनकी बेटी) रह गये थे। अब अमर ने पहले ही अपनी कमसिन बेटी की चूत से खिलवाड़ करने की सोच ली थी। फिर वो रात को घर आई तो रीमा ने खाना लगा दिया।

अब वो रोज की तरह ही स्कर्ट टॉप पहने थी, जो उसकी जांघों तक ही थी और आजकल की लड़कियाँ 12 साल की हुई नहीं कि ब्रा बाँधने का शौक उनको लग जाता है, भले ही उनकी छोटी-छोटी चूची इस लायक ना हो कि ब्रा में समा पाए, लेकिन ब्रा बाँधना लड़कियाँ अपनी शान समझती है और ऐसा मेरा मानना है और रीमा तो वैसे भी कॉनवेंट में पढ़ने वाली लड़की थी, तो आप सबको पता ही होगा कि वहाँ की लड़कियाँ सेक्स के मामले में अपने घरवालों के कान काटती है। खैर फिर पापा को खाना देने के बाद वो अपने रूम में जाकर पढ़ने लगी, लेकिन अब अमर तो कुछ और ही चाहता था, अब उसने अपने सारे कपड़े उतारकर सिर्फ़ लुंगी लपेट ली थी और रीमा को आवाज़ लगाई।

रीमा – जी पापा?

अमर – बेटी जरा हाथ पैर दबा दे, आज बदन बहुत दर्द कर रहा है। ये कोई नयी बात नहीं थी और अमर अक्सर ही अपनी बेटी और बेटे से हाथ पैर दबवाता था, हालांकि कई बार उसकी बीवी मना कर चुकी थी कि अब बेटा-बेटी बड़े हो रहे है और उनसे ये काम मत करवाया करो, में जब भी फ्री हूँ मुझे बुला लिया करो, लेकिन अमर नहीं मानता था। खैर तब उसका दिल साफ था, लेकिन आज तो उसके दिल में पाप था।

अमर – बेटी तेल की शीशी भी लेती आना।

रीमा – पापा जी आप लेट जाइए और बताइए कहाँ से शुरू करूँ?

अमर – बेटा पहले हाथ में मालिश कर दे।

फिर रीमा हाथ पर तेल डालकर कर मालिश करने लगी। अब अमर उसकी चूचीयों को घूर रहा था, लेकिन रीमा को ख्याल भी नहीं था, अब उसका पूरा ध्यान मालिश पर लगा हुआ था।

अमर – बेटी, अब जरा पैरो पर भी कर दे।

फिर रीमा अपने पापा के पैरों पर मालिश करने लगी और जब घुटनों के ऊपर की तरफ उसके हाथ बढे तो उसे पापा की जांघों के जोड़ के पास यानि की लंड के पास कुछ सनसनाहट सी लगी और पहली बार उसे कुछ शर्म सी आई, क्योंकि वो भी समझ गयी थी की आज पापा ने नीचे कुछ नहीं पहना है और अभी आगे वो जो-जो मालिश करेगी, तो पापा का लंड ऐसे ही उछल कूद मचाता रहेगा।

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अमर – बेटी थोड़ा और ऊपर की तरफ अपना हाथ फैरो।

रीमा – जी पापा।

अब वो बिल्कुल ऊपर अपना एक हाथ ले जाकर सहलाने लगी थी और अब तो लंड महराज़ ने अपनी उछल कूद और भी बढ़ा दी थी, जिसे वो पापा से नजर बचाकर देख रही थी और अमर भी इस बात को समझ रहा था। फिर अचानक से ही अमर ने अपनी लुंगी हटा दी, जिससे उसका लंड पूरी तरह से तनकर सलामी देने लगा। तो रीमा शर्माकर पीछे हट गयी और अपना मुँह दूसरी तरफ फैर लिया।

अमर – क्या हुआ बेटी? आज इसकी भी मालिश कर दो।

रीमा – हाए पापा मुझे बहुत शर्म आ रही है।

अमर – अरे बेटी इसमें भला क्या शर्माना? अब तेरी माँ तो यहाँ है नहीं और ये आज अकड़ भी बहुत रहा है, तू मालिश कर दे वरना में रातभर परेशान रहूँगा, तेरी माँ होती तो वो बेचारी मालिश कर देती थी। अब वो 5-6 दिन के लिए घर गयी है, तो आज प्लीज तू ही कर दे और फिर मुझसे क्या शर्माना?

रीमा – पापा मुझे बहुत शर्म आ रही है, लेकिन अगर आपको तकलीफ़ है तो में अपना मुँह दूसरी तरफ करके आपके इस पर मालिश कर देती हूँ।

अमर – अब तू शर्मा रही है तो रहने दे जा जाकर अपने रूम में सोजा, में झेल लूँगा ओके।

फिर जब रीमा ने देखा कि पापा का मूड थोड़ा अपसेट हो गया, तो वो कांपते हाथ से पापा के लंड को पकड़कर बोली कि लाइए में इस पर मालिश किए देती हूँ।

अमर – ये तुने इस पर इस पर क्या लगा रखा है? नाम नहीं पता क्या? और बहुत स्मार्ट बनती है?

रीमा – पापा मुझे इसका नाम पता है।

अमर – तो बता क्या कहते है इसे?

रीमा – लंड।

अमर – हाँ, तो क्या मैंने तुझे काट खाया? तुने इसका नाम लिया तो, ले पकड़ और ठीक से मालिश कर।

तो फिर रीमा अपने पापा के लंड पर मालिश करने लगी, जिससे उनके लंड में और तनाव आने लगा था और अब वो 7 इंच का होकर फनफनाने लगा था।

अब इतनी देर तक लंड पर हाथ फैरने के बाद रीमा के बदन में भी सुरसुरी होने लगी थी, हालांकि उसने भी बी.एफ बहुत देखी थी, लेकिन आज तक किसी का नंगा लंड पहली बार ही देख रही थी और अब उसे भी कुछ-कुछ होने लगा था। अब उसका मन कर रहा था की पापा का लंड ऐसे ही सहलाती रहे।

अमर – बस बेटी अब रहने दे, बहुत आराम मिल गया, अब तू भी जाकर आराम कर ले।

हालांकि अब अमर का मन कर रहा था की बेटी को बेड पर पटककर उसकी कमसिन चूत के ऊपर चढ़ जाए, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो पा रही थी और रीमा का मन भी यही कर रहा था, लेकिन उसकी भी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। तो तब अमर बोला कि बेटी ला आज में भी तेरी मालिश किए देता हूँ।

रीमा – नहीं-नहीं पापा रहने दीजिए और मेरे हाथ पैर में दर्द भी नहीं है।

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अमर – अरे तो क्या हुआ? जब तू छोटी थी तो तेरी मम्मी मालिश करती थी, आज में किए देता हूँ, चल अपना टॉप उतार दे और बेड पर लेट जा और हाँ अब शर्माना बंद कर दे।

फिर अमर ने रीमा का टॉप उतार डाला। अब नीचे काली ब्रा में उसकी छोटी-छोटी चूचीयाँ किसी कड़ियल अमरूद की तरह शेप में थी। फिर अमर ने उसको लेटा दिया और उसके पेट पर थोड़ा सा तेल गिराकर अपने हाथ से सहलाने लगे। तो कुछ देर सहलाने के बाद वो बोले कि बेटी अब ये ब्रा अपने हाथ से उतार दो।

रीमा – पापा मुझे बहुत शर्म आ रही है, आप खुद ही उतार दो।

अमर – अरे बेटी अब भी शरमा रही है, तू पता नहीं कितना शरमाती है? ला में ही निकाल देता हूँ और फिर अमर ने रीमा की ब्रा उतार दी, जिससे रीमा की चूची पूरी तरह से नंगी हो गयी और उसकी ब्रा के उतरते ही रीमा ने अपने दोनों हाथ अपने सीने पर ले जाकर अपनी नन्ही चूचीयों को छुपाने की कोशिश की, लेकिन अमर ने उसका हाथ हटा दिया तो रीमा ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर पापा ने रीमा की ब्रा उतारकर जब उसके पेट पर थोड़ा सा तेल डाला, तो बेचारी रीमा शर्म के मारे उनसे नजरे नहीं मिला पा रही थी, लेकिन उसके बाप यानि की अमर को कहीं से शर्म नहीं आ रही थी, वो तो आज अपनी नाज़ुक सी बेटी की फूल सी रानी की चूत की बखिया उधेड़ने वाला था।

अमर – बेटी तेरी चूचीयाँ कितनी टाईट हो रही है? अभी इनकी मालिश करता हूँ और फिर अमर ने ढेर सारा तेल रीमा की चूची पर गिराकर उस पर अपना एक हाथ फैरने लगा, जिससे रीमा को मस्ती आने लगी थी, लेकिन उसका चेहरा अभी भी दूसरी तरफ था। अब उसकी शर्म दूर करने के लिए अंकल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और अपना लंड रीमा के हाथ में थमा दिया था। फिर जब रीमा को एहसास हुआ कि उसके हाथ में कुछ है तो उसने अपना चेहरा उस तरफ करके देखा, तो उसके पापा का लंड उसके हाथ में था और रीमा ने आदमी का नंगा लंड पहली बार ही देखा था। अब पापा भी उसकी चूचीयों पर तेल लगाकर मालिश कर रहे थे। अब उसकी चूचीयाँ पहले से ही खड़ी थी और अब थोड़ी सी और टाईट हो गयी थी।

अमर – बेटी अब तुम थोड़ा सा मेरे लंड पर दुबारा से मालिश कर दो, अभी जो तुमने तेल लगाया था सब सूख गया है।

रीमा – जी पापा।

फिर रीमा पापा के लंड पर तेल लगाने लगी। अब उसका मुलायम हाथ जब अमर के लंड पर रेंगता तो अमर की वासना सातवें आसमान पर पहुँच जाती। अब रीमा भी गर्म हो चुकी थी, आख़िर वो भी 18 साल की लड़की थी और आप लोग तो जानते ही है आजकल की लडकियाँ कितनी गर्म होती है? फिर उसने तुरंत ही पापा का लंड पकड़कर रगड़ना शुरू कर दिया।

अमर – बेटी इसे अपने मुँह में लेकर देखो, कितना मज़ा आएगा?

रीमा – छी पापा, भला ये भी कोई मुँह में लेने की चीज है?

अमर – बेटी तेरी माँ तो बिना मुँह में लिए एक रात भी नहीं रह पाती, जरा सा लेकर तो देखो।

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फिर रीमा ने झिझकते हुए पापा के लंड को अपने होंठो पर लगा लिया और चूमने लगी और अभी वो चूम ही रही थी कि अमर ने उसके बाल पकड़कर एक धक्का मारा, जिससे की उनका पूरा लंड रीमा के मुँह में चला गया था और वो गूँ गूँ करने लगी थी, लेकिन अब अमर तो अपनी मस्ती में था, अब वो दनादन अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर किए जा रहे थे और अब रीमा को भी लंड चूसने में मज़ा आ रहा था। अब वो भी अपने चेहरे को आगे पीछे करके लंड चूस रही थी। फिर तब ही अमर ने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ की तरफ ले जाकर उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी गांड को खोदना शुरू कर दिया, तो वो चीख पड़ी।

रीमा – आह पापा क्या कर रहे है? वहाँ पर क्या चुभ रहा है?

अमर – बेटी अभी तो मैंने कुछ भी नहीं किया है बस तेरी गांड जरा सी कुरेदी है, तू जरा पलटकर घूम जा और अब अपनी पेंटी भी उतार दे, फिर देखना तुझे कितना मज़ा आता है?

रीमा – नहीं पापा मुझे शर्म आती है।

अमर – बहन की लोड़ी, साली रांड, छिनाल अभी लंड चूस रही थी तो शर्म नहीं आ रही थी? अब शर्म आ रही है, चल पलटकर घूम जा बाकी काम में कर लूँगा।

फिर अमर ने रीमा को बेड के सिरहाने की तरफ घुमा दिया और उसके चूतड़ अपनी तरफ खींचकर उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी छोटी सी गांड को सहलाने लगा। अब अमर अपने एक हाथ से उसकी गांड को सहला रहा था और अपने दूसरे हाथ से उसकी चूचीयाँ सहला रहा था और फिर अचानक से ही उसने उसकी पेंटी खींचकर निकाल दी। अब रीमा पूरी तरह से नंगी हो गयी थी और उसकी गांड का गुलाबी सुराख अमर को साफ-साफ नजर आ रहा था।

अमर – वाह बेटी तेरी गांड का छेद अभी कितना छोटा है?

अब ये कहकर उन्होंने अपने होंठ रीमा की गांड से लगा दिए और रीमा की गांड को चूमने लगे और फिर अपनी जीभ उसकी गांड का छेद फैलाकर अंदर डालने लगे थे।

रीमा – आहह पापा, प्लीज ऐसा नहीं कीजिए, बहुत गुदगुदी हो रही है।

अमर – बेटी अभी बहुत मज़ा आएगा, तू बस देखती जा।

फिर उसके बाद उसने रीमा की गांड का छेद और फैला दिया और अपनी दो उंगलियाँ उसकी गांड के अंदर डालने लगा।

रीमा – आआआहह, आाईईईई, पापा प्लीज क्या कर रहे है? उऊईईईई, उउफफफफफफफफ्फ, प्लीज पापा दर्द हो रहा है, लेकिन अब अमर कहाँ मानने वाला था? फिर उसने अपनी दो उंगलियाँ अंदर डालने के बाद अपने होंठ फिर से रीमा की गांड पर लगा दिए और अपनी उँगलियों को अंदर बाहर करता हुआ उसकी गांड को काटने लगा। अब रीमा का दर्द कुछ कम हो गया था और इस तरह से कुछ देर तक उसकी गांड में उंगलियाँ करने के बाद अमर का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और फिर अमर ने अपनी बेटी की गांड मारी और उसने अभी तक उसकी चूत देखी भी नहीं थी, क्योंकि वो गांड का दीवाना था और अपनी बीवी की भी गांड ही ज़्यादा मारता था और पहली बार गांड मरवाने में रीमा को भी मजा आया ।।

धन्यवाद …