छिनाल बहन की फटी चूत

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरी दीदी का नाम राधिका है। मेरी दीदी राधिका को गंदी किताब पढ़ने की बुरी आदत हो गयी थी। अब वो अपनी किताब में चुदाई की कहानियों की किताब छुपाकर पढ़ने के बहाने चुदाई की कहानी पढ़कर अपनी चूत में उंगली डालकर चुदाई के मज़े लेती थी। अब वो अपनी चूत में उंगली डालकर और पैरो को हिला-हिलाकर खूब आनंद लेती थी। अब मेरी दीदी राधिका हमारे पड़ोस में रहने आए सरदार जी के साथ काफ़ी घुलमिल गयी थी, उसकी बीवी और दो बच्चे थे। मेरी दीदी राधिका उसे जीजाजी कहा करती थी। फिर जब गर्मी के दिनों में मेरी दीदी और मेरी माँ घर के आँगन में रात को चारपाई पर साथ में सोए हुए थे। फिर रात को करीब 1-2 बजे सरदार जी रात को मेरी दीदी की चारपाई के पास बैठ गया। अब सरदार जी मेरी दीदी को धीरे-धीरे सहलाने लगा था और मेरी दीदी राधिका चुपचाप पड़ी रही। फिर थोड़ी देर के बाद सरदार जी मेरी दीदी का फ्रॉक ऊँचा करके उसके स्तन (बूब्स) को अपने दोनों हाथों में पकड़कर मसलने लगा और दबाने लगा था।

अब मेरी दीदी भी उत्तेजित होकर मजा लेने लगी थी। अब थोड़ी देर के बाद में सरदार जी मेरी बहन को खींचकर बाथरूम की तरफ ले जाकर चुदाई करने ही वाला था कि मेरी माँ जाग गयी, तो तब सरदार जी डरकर भाग गया। अब मेरी दीदी शरीफजादी बनकर अपनी सफाई देने लगी थी कि मुझे खबर नहीं थी कि सरदार जी मेरी चारपाई पर आकर उसे कब से दबोचकर उसके स्तन को मसलकर सहला रहा है। मेरी दीदी के हमारे पड़ोस में रहने वाले के लड़के के साथ नाजायज सेक्स संबंध थे, उस समय उसकी उम्र 18 साल थी।

फिर एक रात को जब मेरी माँ ने देखा कि मेरी दीदी घर में पलंग पर सोई हुई नहीं है तो उसने मुझे जगाया। तो तब मैंने आजू बाजू जाकर तलाश किया और उसको ढूँढने लगा। अब रात के 2 बजे मेरी दीदी कल्लू के पास जाकर चुदवा रही थी। अब कल्लू ने मेरी दीदी को पूरा नंगा करके उसकी कुँवारी चूत में अपना मोटा 9 इंच का लंड डाल दिया था। मेरी दीदी की चूत की झिल्ली फट गयी थी और उसकी चूत भी फट गयी थी। अब दीदी की चूत में से खून निकल रहा था। अब मेरी दीदी ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी और लंगड़ा-लंगड़ाकर चल रही थी। मेरी दीदी ने अंदर चड्डी भी नहीं पहनी थी और सिर्फ़ फ्रॉक पहना था। अब मेरी दीदी की चूत चुदाई की वजह से फूलकर लाल टमाटर की तरह हो गयी थी। अब उसकी चूत भी फट गयी थी। अब दीदी की चूत में से कल्लू का वीर्य और पहली चुदाई का खून निकलकर मेरी दीदी की चूत से धीरे-धीरे निकलकर उसकी जाँघ पर से टपक-टपककर बह रहा था और उसके पैर पर भी खून के दाग दिखाई दे रहे थे।

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मेरी दीदी की चूत पर झांट के बाल भी नहीं थे, क्योंकि दीदी ने अपनी चूत के बाल ब्लेड से काटे थे इसलिए दीदी की चूत बिल्कुल साफ़ दिख रही थी। दीदी की चूत एकदम लाल लाल टमाटर की तरह दिख रही थी और चूत का अंदर का भाग एकदम गुलाबी कलर का था। फिर मेरी माँ ने घर ले जाकर उसे पलंग पर सुलाकर उसका फ्रॉक उतारकर दीदी को नंगी करके दीदी की चूत देखी। अब दीदी की चूत फटी हुई थी और चुदाई की वजह से लाल हो गयी थी। अब दीदी की चूत में से वीर्य और पहली चुदाई का खून निकलकर उसकी जांघो और फ्रॉक पर गिरा हुआ था। उसकी फ्रॉक भी कई जगह खून के लाल दाग की वजह से खराब हो गयी थी। अब दीदी रो रही थी और सिसकारियाँ मार रही थी। अब मेरी दीदी की चुदाई की वजह से बुरा हाल हो गया था। फिर मेरी माँ ने उसे खूब पीटा और कहने लगी कि रंडी चुदाई के मज़े लेकर आ गयी, कल्लू ने तो तेरी चूत की बराबर की चुदाई की है, तेरी चूत तो फट गयी है और खून के साथ कल्लू का पानी भी तेरी चूत से निकलकर तेरी जाँघो पर बह रहा है, रंडी कल्लू से अपना काला मुँह करवा लिया, उसने तुझे चोदते वक्त निरोध लगया था या नहीं? तो तभी मेरी दीदी ने रोते हुए कहा कि उसने निरोध लगाए बिना ही मुझे चोदा है, कल्लू ने मुझसे कहा था कि निरोध लगाकर चोदने से चुदाई का मज़ा नहीं आता है इसलिए उसने मुझे निरोध लगाए बिना ही चोदा है। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मेरी माँ ने पूछा कि रंडी जब तुझे लंड डाला तब तो चिल्लाई नहीं और अब रो रही है, कल्लू ने दिल खोलकर तेरी चूत की चुदाई करके मजा लिया है, रांड चड्डी कहाँ पर डालकर आई है? तो मेरी दीदी कुछ भी नहीं बोली। फिर मेरी माँ ने उसे बाथरूम में ले जाकर दीदी को नहलाया और दीदी की चूत में अपनी उंगली डाल-डालकर रगड़-रगड़कर दीदी की चूत पानी से साफ की। अब माँ को डर था कि कहीं कल्लू का वीर्य राधिका के गर्भाश्य में चला गया होगा तो शायद उसकी बेटी गर्भवती हो सकती है, कल्लू के नाजायज बच्चे की माँ बनकर। अब मेरी दीदी खूब चिल्लाती थी और झटपटाती रहती थी। अब वो कराह रही थी और सिसकारियाँ मार-मारकर रो रही थी।

अब मेरी दीदी अपनी पहली चुदाई की वजह से दूसरे दिन बिस्तर पर से उठ भी नहीं पा रही थी। फिर मेरी दीदी को पलंग पर संपूर्ण नंगी देखकर और उसकी गोरी-गोरी लाल-लाल टमाटर की तरह सूजी हुई चूत को देखकर मेरी भी इच्छा हुई और मेरी भी काम वासना भड़कने लगी कि अपनी रंडी दीदी को चोद दूँ, लेकिन मेरी इतनी हिम्मत नहीं थी कि में उसकी चुदाई कर दूँ। फिर मेरी माँ ने उसे लेडी डॉक्टर के पास ले जाकर गर्भ निरोधक गोलियाँ खिलाई, वरना वह भी अपने कुंवारेपन में ही गर्भवती हो जाती और कल्लू के नाजायज बच्चे की माँ बन जाती। फिर उसके बाद जब भी मेरी दीदी को कोई मौका मिलता तो वो चुपचाप घर से निकलकर कल्लू के पास जाकर अपनी मस्त चुदाई करवाकर आती।

 

अब जब भी वो चुदवाकर आती तो दीदी ठीक तरह से चल नहीं पाती थी, अपनी गांड और कूल्हें मटका- मटकाकर चलती थी, क्योंकि कल्लू अपने 9 इंच के कड़क लंड से मेरी दीदी की चूत की बहुत बुरी तरह से चुदाई करता था। मुझे यह इसलिए मालूम है कि कल्लू मेरे पड़ोस में रहता था और मुझसे बड़ा था, लेकिन हम सबसे उसकी दोस्ती थी, वो अपना लंड निकालकर सबको दिखता था, उसका लंड मोटा काले रंग का था और उसके लंड पर झांट के बाल भी बहुत सारे थे। कल्लू मुझसे कहता था कि तेरी दीदी की तो में मस्त चुदाई करता हूँ, ज़रा अपनी दीदी की चूत तो देखकर आ। तो में क्रोध से तिलमिला उठता था, लेकिन में कुछ नहीं कर सकता था, क्योंकि दीदी ही अपनी मर्जी से उसके पास जाकर चुदवाती है। फिर एक दिन सुबह में अंदर के रूम में अचानक से गया तो हमारे अंदर के रूम में ही नहाने धोने के लिए थोड़ी जगह है। तो अंदर घुसते ही मैंने देखा कि मेरी दीदी पूरी नंगी खड़ी है, उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, उसकी चूत पर बहुत सारे झांट के बाल थे, उसके स्तन भी बड़े-बड़े गोलाई लिए हुए सुडोल और भरावदार थे। अभी भी दीदी के स्तन पहले से ज़्यादा बड़े-बड़े और आम की साईज के बड़े-बड़े और मस्त है।

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अब में अपनी दीदी को संपूर्ण नंगी देखकर बोखला गया था। अब मेरी दीदी भी शर्मा गयी थी और अब उसने शर्म से लाल-लाल होकर अपना मुँह नीचे करके अपनी आँखें नीचे की तरफ झुका ली थी। अब मेरे दिल-दिमाग में काम वासना का भूत सवार हो गया था। अब में अपनी दीदी से ही संभोग करने के लिए मानो उतावला होकर पागल सा गया था और अपनी ही दीदी की चुदाई करने के लिए तड़पने लगा था, लेकिन में मजबूर था, क्योंकि बाहर किचन में से मेरी माँ चिल्लाने लगी थी कि तेरी दीदी नहा रही है। तो मुझे मजबूर होकर वापस लोटना पड़ा, उस मौके का मुझे आज भी बहुत ही खेद और दुख है कि अपनी जिंदगी की पहली चुदाई का मौका मेरे हाथ से निकल गया था ।।

धन्यवाद …