जिसे रात के अंधेरेमें चोदा वोह बहन निकली भाग-2

अब मेरे दिमाग ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया। मैं बिल्कुल Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai कामातुर हो चुका था, मैं यह भूल चुका था कियदि दीदी ने जागकर देख लिया तो पता नहीं क्या सोचने लगेगी ! अब मैं रानी के स्तनों के साथ उसकी चूत को भीमसलना चाहता था। मैंने आहिस्ता से उसका साया खोल कर उसकी मखमली पैंटी पर हाथ रख दिया और कोईप्रतिक्रिया न देखकर फिर अंदर चूत को सहलाने के लिये हाथ बढ़ाया तो मेरा हाथ उसके दाने से टकराया। बिल्कुलछोटी मखमली झांटों को सहलाने का लुत्फ उठाने लगा। अब लगा मेरे दोनों हाथों में जन्नत है, मेरा बायां हाथ तोउसके वक्षों से खेल रहा था और दायां हाथ उसके वस्ति-क्षेत्र का भ्रमण कर रहा था।

अब मुझे यह तो सुनिश्चित हो चुका था कि वह नींद में नहीं है तो मैं हौले से उसके भग्नासा के दाने को सहालाकरउत्तेजित करने की कोशिश करने लगा। पर वह भी आँखें मींचकर पड़ी हुई थी। मैंने सोचा कि अब यह गर्म है तोसमय भी तो तेजी खिसका जा रहा है, इसके लिये दूसरा उपाय करना होगा। इधर उसके सिर के तरफ़ मैंने लण्ड कारुख करके उसके मुँह के ऊपर रखा था तो मेरा लण्ड मुँह खोलकर चूसने लगी। अब मैंने अपनी लुन्गी खोलकरकमर से हटाते हुए उसके मुँह से पूरा सटा दिया, उसमें से चिपचिपाहट भी निकल रही थी जो उसके होंठों को गीलाकर रही थी। अब दोबारा मैंने अपने दोनों हाथों को व्यस्त रखते हुए उसकी चूत में अपनी उंगली प्रविष्ट कराई तोदेखा वहाँ गीला-गीला सा था, मतलब वह गर्म हो चुकी थी।

स्तन मर्दन के साथ जैसे ही मैंने उंगली चूत में अंदर-बाहर करनी शुरु की तो रानी छटपटाने लगी और उसने अपनीनींद का नाटक छोड़ा और मेरी तरफ करवट बदलकर मेरे चूतड़ों पर हाथ फिराने के बाद उसे लण्ड अपने मुँह मेंतेजी से चूसना शुरु कर लिया। मैं तो अपने होशोहवास खो चुका था, वह भी पागलों की तरह लण्ड मुँह मेंअंदर-बाहर कर रही थी। उधर मैं भी उसे अपने दोनों हाथों से बराबर उसे उत्तेजित कर रहा था।

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मैंने कमरे में अपने बगल की तरफ देखा, दीदी आराम से सोई हुई थी और सम्पूर्ण अंधेरा था, तो कोई डर नहीं थाकि देख लेंगी।

हम दोनों किसी भी किस्म की आवाज नहीं निकाल रहे थे क्योंकि दीदी जाग सकती थी। अब रानी की लगातारमेहनत के कारण दस मिनट में ही मेरा लण्ड स्खलित होने की कगार पर पहुँच गया, तो मैंने उसे हाथ के इशारे सेसमझाने की कोशिश की पर उसने इस पर ध्यान नहीं दिया। तो मैं भी क्या करता, मैंने भी वीर्य का फव्वारा उसकेमुँह में छोड़ दिया। उसने भी हिम्मत दिखाते हुए पूरा का पूरा गटक लिया।

अब मैं तो खाली हो गया किन्तु उसकी उत्तेजना शांत नहीं हुई थी, वह मेरे निर्जीव पड़े लण्ड को खड़ा करने कीकोशिश करने लगी। मात्र पाँच मिनट में ही हम दोनों सफल हो गये। मेरा लण्ड फिर कड़क होकर फुंफकारने लगा।फिर एक दूसरे के शरीर को चूमने-सहलाने लगे। अब हम दोनों पागलॉ की तरह लिपट गये और एक दूसरे के शरीरको टटोल कर आनंद लेने लग गये। अब मैंने उसकी चोली खोल दी और पैंटी भी उतार दी, उसके तन व मेरे बीच मेंकोई नहीं था।

मैं अब बेड पर बैठ गया, वह मेरी गोद में दोनों टांगों को बीच में लेकर अपने टाँगों को मोड़ कर इस प्रकार बैठी किउसकी चूत मेरे लण्ड को स्पर्श करने लगी। वह मेरे सीने को हाथ से सहला रही थी, नीचे चुदाई चालू थी, वह भीहिलकर अपने शरीर को ऊपर नीचे होकर पूर्ण सहयोग कर रही थी। फिर मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों परअपनी जीभ फिराने लगा। उसके बाद मैंने उसकी गर्दन की दोनों तरफ कामुकता बढ़ाने वाली नस के साथ उसकेकान की लोम व आँखों की भोहों पर भी अपनी जीभ फिराई। वह मदमस्त होकर पागल हो उठी। दोनों की सांसें एकदूसरे में विलीन हो रही थी। यदि हम किसी एकान्त कमरे में होते तो पागलपन में न जाने कितनी आवाजेंनिकालते। पर जगह और समय का ध्यान रखते हुए बिल्कुल खामोश रहने की कोशिश करते रहे।

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अब इस मदहोश करने वाली अनवरत चुदाई को लगभग आधा घण्टा हो चुका था। अब एक ही आसन में चोदते हुएथकान होने लगी थी। तभी रानी ने मुझसे गति बढ़ाने का इशारा दिया और कुछ ही क्षण में हांफते हुए वहचरमसीमा पर पहुँच गई। फिर वह पस्त होकर ढीली पड़ कर लेट गई।

मैं तो अभी तक भरा बैठा था, मैंने कुछ समय रुककर इशारा किया कि अब मैं भी पिचकारी छोड़ना चाहता हूँ तोउसने इशारे से कहा- रुको !

वह खड़ी हुई और बेड पर हाथ रख और सिर झुकाकर खड़ी हो गई। मैंने भी पीछे से उसकी चूत में लण्ड पेल दियाऔर अपने दोनों हाथों से उसके उन्नत स्तनों को मसलते हुए उसे चोदने लगा। फिर जन्नत की यात्रा शुरु हुई। फिरमदमस्त होकर वह भी आगे पीछे होकर मुझे सहयोग देने लगी। हम दोनों ने अपनी गति और बढ़ा दी और लगभगदस मिनट बाद मेरी पिचकारी छुट गई, हम दोनों पस्त हो गये।

वह कुछ समय रुक कर सफाई करने बाथरुम मे जाकर वापिस अपनी बिछावन पर आ गई। भगवान कालाख-लाख शुक्र था कि दीदी अब तक सोई हुई थी और उनको इस चुदाई के बारे में शक भी नहीं हुआ।अब मैं अपने कमरे मे आकर आराम से सो गया आज सुबह मेरा मन काफ़ी खुश था मैंने रसोई में बीवी को जबअकेले देखा तब उसके पास जाकर पीछे से बाहों मे भर चूमना शुरु कर दिया। रानी मुझे मनाने के लिये मेरे बालों मेउंगली फिराते बोली- सॉरी जी ! मैं रात में सो गई पर आप भी नहीं आए?

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मेरे कान में इतना पड़ना था कि मेरे दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया।

तो क्या मेरे साथ रात में दीदी थी, अब मैं समझ गया !

यह घटना मेरे मन-मस्तिष्क पर एक चलचित्र की तरह स्पष्ट चल रही थी। हालांकि मैं भ्रम में रह गया लेकिन जबजान ही गया तो दोनों की तुलना करने लगा तो पाया कि वाकई में रानी से ज्यादा मजा तो दीदी को चोदने में आया !

और अब वह अलग कमरे में भी सो कर मुझसे हर दो दिन बाद चुदती है, नैहर (मेरे घर) अब अकसर आती है मेरेसाथ चुदाई के लिये और फिर उसके पास मैं भी अक्सर जाने लगा हूँ। वह आज भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त है।

रानी आज तक न जान पाई और ना मैंने उसे बताया। वह भी एक अद्वितीय अनुभव था।मैं रानी के फीगर के बारे में आपको बताना ही भूल गया। वह इतनी खूबसूरत है जैसे कोई माडल हो, उम्र लगभग बाइस वर्ष, एकदम संगमरमरी गौरी चमड़ी, जैसे नाखून गड़ा दो तो खून टपक जायेगा, सर पर भूरे रंग के लम्बे बाल, अप्सराओं जैसा अत्यन्त खूबसूरत चेहरा, बड़ी-बड़ी काली आँखें जिनमें डूबने को दिल चाहे, तीखी नाक, धनुषाकार सुर्ख गुलाबी रंगत लिये हुए होंठ, अत्यन्त मनमोहक मुस्कान जो सामने वाले को गुलाम बना दे। लम्बाई लगभग पांच फीट छह इंच, स्तन 34, कमर 26 और कूल्हे 36 ईंची !