सेक्सी मामी की जवानी का रस

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम दीपक है। में दिल्ली का रहने वाला हूँ और में चोदन डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ, आज में आप सबको अपनी एक रियल स्टोरी बताने जा रहा हूँ। अब में आपको ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। यह स्टोरी 8 साल पहले शुरू हुई थी, जब में 18 साल का था, में उस वक़्त तक सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। जब मेरे मामा की शादी हुई थी। मेरे मामा जी हमारे साथ ही रहते थे, मेरी मामी बहुत सुंदर है। में उनके फिगर के बारे में इतना ही कहूँगा कि उनको देखते ही गले लगाने और चोदने का मन करता है, लेकिन में उनसे दूर दूर रहता था। मेरी मामी को मेरे मामा पसंद नहीं थे, तो वो उनसे दूर ही रहती थी।

यह सर्दियों की बात है, फिर एक दिन हम सब रज़ाई में बैठे हुए थे। अब में अपनी मामी के करीब लेटा हुआ था, तो तभी अचानक से मैंने महसूस किया कि उनका हाथ मेरे हाथ में था, अब उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था, तो में थोड़ा डर गया, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, क्योंकि मैंने पहली बार उनकी स्किन को टच किया था, बड़ी मखमली स्किन थी। अब थोड़ी देर के बाद मेरा हाथ उनके पैरो में था। अब में उनके पैरो को सहला रहा था। अब मेरा मन कर रहा था कि में अपना हाथ उनकी साड़ी के अंदर तक ले जाऊं मगर मेरी हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि सभी वहाँ बैठे हुए थे और में नहीं जानता था कि उनको अच्छा लगेगा या बुरा। फिर कुछ देर के बाद उन्होंने मेरा हाथ अपनी कमर पर रख दिया, लेकिन मैंने अपना हाथ सरका लिया, लेकिन अब मेरा हाथ उनकी चूत पर था, अब में गर्म हो गया था और उनकी चूत ढूंढने लगा था, लेकिन उनकी साड़ी की वजह से नहीं ढूंढ पाया था। अब में बिल्कुल गर्म हो चुका था इतना कि मेरे पसीने छूट गये थे।

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अब में हर बार स्कूल से आकर उनके पास सो जाता था, लेकिन मेरी फेमिली भी वहाँ होती थी इसलिए में उन्हें छूने के लिए पूरी सावधानी बरत रहा था। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने पैर से उनके पैर को छूना शुरू किया, उउउफफफफ्फ़ क्या चीज थी मेरी मामी? में आपको बता नहीं सकता। अब वो भी मेरा साथ देने लगी थे। फिर में अपना पैर धीरे-धीरे उनके घुटनों तक ले आया, उफ़ क्या मखमली स्पर्श था? अब हम एक दूसरे के पैरो को सहलाने लगे थे। फिर ये सिलसिला चलता रहा, लेकिन हमने इस बारे में कभी भी बात नहीं की थी। फिर कुछ दिनों के बाद मुझे एक मौका मिला। अब उस दिन में हमेशा की तरह मामी जी के पास सोया हुआ था और वहाँ मेरा छोटा भाई ही था। अब मेरी हिम्मत बढ़ गई थी, अब मामी टी.वी देख रही थी, तो मैंने पहले अपना एक हाथ उनकी पतली मखमली कमर पर रखा, उउफफफफ्फ़ क्या एहसास था? और फिर में काफ़ी देर तक उनकी कमर को सहलाता रहा।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया, उनके बूब्स छोटे थे, लेकिन बहुत मस्त थे, मैंने पहली बार किसी औरत के बूब्स को छुआ था। अब में उनके मज़े ले पाता इससे पहले मामी ज़ी ने मेरा हाथ हटाकर वापस से अपनी कमर पर रख दिया, लेकिन पहली बार के लिए इतना ही काफ़ी था। फिर यह सिलसिला कुछ और दिन चला। फिर मेरे मामा जी ने अपना नया घर ले लिया और वो लोग चले गये। फिर कई सालों तक में उन्हें नहीं छू सका। फिर कुछ सालों के बाद मेरी मम्मी ने मुझे अपने मामा जी को डिनर पर इन्वाइट करने के लिए उनकी दुकान पर भेजा, तो मेरे मामा जी ने कहा कि वो देर से आएँगे इसलिए में मामी ज़ी को अपने साथ ले जाऊं। उनका घर पास ही में था, तो में उनके घर चला गया और मामी ज़ी को अपने साथ चलने के लिए कहा, तो वो तैयार होने के लिए चली गई, लेकिन उनके घर में एक ही रूम था, तो वो वहीं चेंज करने लगी। फिर तभी मैंने सोचा कि काश ये मेरे सामने ही कपड़े बदल ले, लेकिन ये असंभव था। अब वो एक दीवार के पीछे चली गई थी और कपड़े बदलने लगी थी। तो मेरा मन हुआ की में इस जालिम दीवार को तोड़ दूँ, जो मुझे उन्हें नंगा देखने से रोक रही है। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर कुछ देर के बाद वो बाहर आई, वो क्या लग रही थी? वो नीली साड़ी पहने कयामत लग रही थी, उन्होंने अपनी साड़ी कसकर बांधी थी और उनका पूरा फिगर कयामत था। अब में अपने मामा जी से जल रहा था। फिर मैंने सोचा कि अगर में मामा जी की जगह होता, तो मामी ज़ी को रोज सुबह शाम रात चोदता ही रहता, लेकिन मैंने अपने आपको संभाला और उन्हें लेकर अपने घर आ गया। अब डिनर के बाद लेट होने की वजह से मेरी मामी ज़ी हमारे घर ही रुक गई थी, वैसे तो आप लोगों के लिए यह नॉर्मल ही होगा, लेकिन मेरे लिए तो वो रात स्वर्ग में होने जैसी थी। फिर डिनर के बाद में जल्दी ही सो गया। फिर जब आधी रात को मेरी नींद टूटी तो मैंने देखा कि मेरे बगल वाले बेड पर जो कि मेरे बेड से सटा हुआ था, उस पर मेरी मामी ज़ी सो रही थी, उनके साथ मेरे छोटे भाई बहन सो रहे थे।

अब में उन्हें छूने का ये मौका नहीं गँवाना चाहता था। फिर मैंने भगवान को याद किया और अपने काम पर लग गया। फिर मैंने पहले अपने पैर से उनके पैर को सहलाना शुरू किया, लेकिन काफ़ी देर तक करने के बाद भी मामी ज़ी ने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया, तो तब मेरी हिम्मत बढ़ गई, लेकिन में थोड़ा सर्प्राइज़ भी था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ उनके मखमली पेट पर रखकर सहलाने लगा। अब यह सब आसान था, क्योंकि उन्होंने साड़ी पहन रखी थी। फिर उनकी पतली कमर के मज़े लेने के बाद मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया, लेकिन अब भी मामीज़ी ने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया, पता नहीं क्यों? अब उनके बूब्स को पकड़ने पर मेरा लंड तन गया था, ऊऊउउउफ्फ्फ्फ क्या अहसास था? अब में धीरे-धीरे उनके बूब्स को दबाने लगा था। अब मेरा मन कर रहा था कि उनका ब्लाउज फाड़ दूँ, लेकिन वो कोई जवाब नहीं दे रही थी।

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लेकिन में चाहता था कि वो जवाब दे इसलिए मैंने अपना एक हाथ उनके हाथों पर, उनकी गर्दन पर और उनके चेहरे पर घुमाने लगा, लेकिन वो फिर भी कोई जवाब ही नहीं दे रही थी। अब में अपना एक हाथ उनके ब्लाउज में डालने लगा था, उनका ब्लाउज बहुत टाईट था। अब में अपना एक हाथ अंदर डालने की कोशिश कर ही रहा था कि तभी मामीज़ी ने जवाब दिया और मेरा हाथ अपने बूब्स पर से हटाकर करवट बदल ली। अब उनका चेहरा मेरी तरफ था, लेकिन अब में रुकने वाला नहीं था तो मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके लेफ्ट बूब्स को फिर से पकड़ लिया और धीरे-धीरे मसलने लगा। अब में मामी ज़ी को किस करना चाहता था, लेकिन मुझे पता नहीं था वो कैसा महसूस करेगी? फिर थोड़ी देर के बाद जब में उनके प्यारे-प्यारे बूब्स को मसल रहा था, तो सपने में उनको चोद भी रहा था तो बस तभी मेरा लंड ढीला पड़ गया और फिर मैंने अपना काम बंद कर दिया। फिर उस दिन के बाद से मुझे आज तक उन्हें छूने का मौका नहीं मिला है और में उदास ही रह गया ।।

  • rajesh malviya

    madt