चूत का नूर और उसकी मज़ा

मैं देसी सेक्स स्टोरी पर कहानियाँ बहुत पहले से पढ रहा हूँ, लेकिन पहली बार अपनी सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ। Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

इस कहानी में सभी पत्रों के नाम बदल दिये गये है, लेकिन जहाँ ये घटनाएँ घटी, उन जगहों के नाम सही हैं…

मेरा नाम निहाल है और मैं बेसिकली कानपुर का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 25 साल है!!

मैंने इसी साल अपनी इन्जीनियरिन्ग पूरी की है, ग्रेटर नोइडा के एक कालेज से और मैं नोइडा की ही एक मल्टी नेशनल कम्पनी में कार्यरत हूँ।

बात तब की है, जब मैं क्लास 12 के बाद कानपुर के काकादेव के ही एक इन्स्टीट्यूट में बी टेक की कोचिन्ग पढ रहा था…

उन्हीं दिनों मैने एक चेटिंग-साइट से गर्ल फ्रेंड बनाई थी, जिसका नाम शाज़िया था और वो गोरखपुर की रहने वाली थी।

मुझमे “चूत की आग” तो बहुत पहले से ही थी पर क्या करूँ, मैं इतना लकी नहीं था की कभी चूत के दर्शन होते।

शाजिया से बात करते मुझे 5 महीने ही हुए थे। मैंने उसे कभी देखा नहीं था और वो वेब पर अपनी फोटो भी नहीं डालती थी। बोलती थी कि जब मिलना तो खुद ही मुझे देख लेना…

अब तक हम फोन पर बात करते करते सेक्स चैट भी करने लगे थे।

मुझे बडा मज़ा आता था और सेक्स चैट करते करते मैं अपना 6 इंच का लौडा हाथ में ले कर मुट्ठ मार लेता था और वो भी अपनी चूत में उन्गली करती थी।

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रोज़ कोचिन्ग जाने में और घर वापस आने में बहुत समय बर्बाद होता था तो मैंने और मेरे ही एक दोस्त ने साथ में काकादेव में ही एक फ़्लैट किराये पर ले लिया।

खैर, कुछ महीने और ऐसे ही बात करते रहने के बाद, मैंने उससे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की।

इस पर उसने बोला – मुझे अगर मिलना है, तो गोरखपुर ही आना पडेगा।

गोरखपुर जाने का मतलब था 15-20 हज़ार का खर्चा। मैं तो तब एक स्टूडेन्ट था। घर से तो मैं पैसे नहीं लेने वाला था।

मेरे पापा जी बहुत सख्त थे, खास कर पैसे के मामले में पर मेरी मम्मी मुझे बहुत प्यार करती थीं और पापा जी से छुप कर अक्सर पैसे भी दे देती थीं…

अब मैंने रोज़ रोज़ कोई ना कोई बहाना बनाकर पैसे माँगना शुरू कर दिया और कुछ ही महीनों में पैसे इकठे हो गये।

फिर मैंने शाज़िया से फोन पर जानकारी ली की गोरखपुर में कौन सी होटल में रुकूँ और वो कहाँ मिलेगी?

ये सब पूछना स्वाभाविक था क्यों कि मैं पहले कभी भी अकेले घर से दूर नहीं गया था और वो भी बिना बताये।

मैंने और मेरे रूम मेट ने चलने की तैयारी की और 5 जनवरी को निकलना तय हुआ।

मैंने एक कार रेन्ट पर ली थी, क्यों की अगर घर से कार ले जाता 2-3 दिनो के लिये और कही कोई गडबड हो जाती तो घर पर मेरी गाण्ड तोड दी जाती।

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मैंने शाज़िया को फोन कर के बताया तो वो बहुत खुश हुई।

जिस दिन हमें जाना था, उस दिन मेरे दोस्त ने दग़ा दे दी और बोला – नहीं जा पायेगा। मेरा मूड बहुत खराब हुआ की मुझे अकेले जाना पडेगा पर मकान मालिक का लड़का, जिन्हें मैं भैया बुलाता था वो चलने को तैयार हो गये।

हम 5 तारीख को शाम के 7 बजे निकल पडे, ताकी सुबह 5-6 बजे पहुँच जाए, उन दिनों ठंड बहुत थी और कोहरा बहुत ज्यादा था तो ड्राइवर ने कार बहुत धीरे चलायी।

मुझे लगा टाईम से नहीं पहुँच पाएँगें पर हम सुबह 5 बजे गोरखपुर पहुँच गये।

वहा पहुँच कर हमने शाज़िया के बताये होटल में एक रूम ले लिया जो कि एक्स्पेन्सिव था पर कोई नहीं यार, पहली बार गर्ल फ़्रेन्ड से मिलने आया हूँ तो चलता है।

मैंने पहुँचते ही शाज़िया को फोन किया, उसने सुबह सात बजे डाक घर के सामने मिलने को कहा।

मैं भैया और ड्राइवर फ़्रेश होकर डाक घर पहुँच गये। वहाँ चाय पी, थोडी देर टहलने के बाद तभी शाज़िया ने फोन करके बताया कि वो अपनी दोस्त के साथ निकल चुकी है।

थोडी देर में पहुँचने वाली है। मैंने उसे बताया की मैं ब्लू कलर की जीन्स में व्हाइट कलर की सैन्ट्रो के पास खडा हूँ। उसने बताया कि वो स्कूटी पर अपनी सहेली के साथ है।

अब मैं बेचैन होने लगा था, मन में कई सवाल चल रहे थे। सोच रहा था – कैसी दिखती होगी? फोन पर तो बहुत बातें करता था सामने उतनी बातें कर पाउँगा या नहीं और होटल वाले उसे मेरे रूम पर जाने देंगें या नहीं।

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मैं सावलों में कहीं खो सा गया था।

भैया ने बोला – टेन्शन, मत ले यार!! मैं हूँ पूरी कोशिश करूँगा कि उसे रूम पर जाने दिया जाये।

उन्होंने बोला – अगर होटल वाले रोकने लगे, तो उनसे बोलना कि हम मीटिन्ग के सिलसिले में यहाँ आये थे जो कि हमने “परपस आफ़ विसिट” में पहले ही होटल पर बोला था।

मुझे उनका ये आइडिया अच्छा लगा।

थोडी देर इन्तेज़ार करने के बाद मैंने शाज़िया को फोन किया कि वो अब तक आयी क्यों नहीं?

तो उसने कहा – जानू, थोडा वेट करो। मैं आ रही हूँ रास्ते पर हूँ।

10 मिनट और इन्तेज़ार करने के बाद, उसका काल आया कि वो बस पहुँचने वाली है।

बस अगले ही पल एक लाल रंग की स्कूटी कुछ दूर पर आकर सड़क के दूसरी तरफ़ रुकी। मुझे लगा वो आ गई पर मैं गया नहीं, क्योंकि वो कोई और भी हो सकता था।

फ़िर मेरे देखते ही देखते स्कूटी की पीछे बैठी लडकी ने फोन निकाल कर कॉल किया और मेरा फोन बजा मेरा कॉल बजते ही उसने मुझे देखा और मैं उसके पास गया।

मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था कि आगे क्या होगा?