स्वामीजी और उसकी शिष्या

स्वामीजी और उसकी शिष्या – Desi hindi kahani – 1

मेरा नाम साक्षी है और मैं एक 39 यियर्ज़ की शादी शुदा औरत हूँ. मेरे फॅमिली मैं मेरे पति अरुण केशव, सेजल और शीना है. हुमारी अरेंज्ड मॅरेज हुई थी. हुमारे शादी को 19 साल हुए है. इसी बीच हुमारी 2 बेठिया हुई. बड़ी का नाम हमने बड़े प्यार से सेजल और छोटी का नाम शीना रखा. मेरे पति एक आवरेज लुकिंग मिड्ल क्लास आदमी है. वो पड़ीाइवेट कंपनी में नौकरी करते थे मगर कंपनी में च्चनटनी के दौरान उनकी नौकरी जाती रही.

हम रीसेंट्ली भोपाल शिफ्ट हुए थे काम की तलाश मैं. मेरे पति को कोई काम नही मिल रहा था. वो काई दफ़्तरों मैं इंटरव्यू देने गये पर फिर भी उन्हे नौकरी नही मिल पा रही थी. इसी कारण हुमारे घर मैं आए दिन झगड़े होने शुरू हो गये. अब घर तो पैसो से ही चलता है. आम आदमी की ज़रूरत कभी ख़तम नही होती. लिमिटेड पैसे होने की वजह से हम काफ़ी टाइम तेनतीऑन मैं ही रहते थे.

फिर मुझे मार्केट जाते समय एक विगयपन दिखा. वो अड्वर्टाइज़्मेंट किसी स्माइल बाबा के नाम से था जिसे लोगो ने काफ़ी बड़ा डर्ज़ा दिया हुआ है. कहते थे की वो मॅन की शॅंटी पड़ीदान करते है और समस्याऑन का नहीवारण निकालते है पूजा कर के. मैं घर जा के आपने पति से यह बात की. मेरे पति इन्न सब बातो मैं विश्वास नही करते.

उन्हो ने मुझसे कहा, “तुझे अगर जाना है तो जाओ पर मुझको इन सब के लिए फोर्स नही करना.”

मैने भी सोचा की उन्हे ज़्यादा फोर्स ना करू और वैसे भी उन्हो ने मुझे जाने की अनुमति दे ही दी थी. मैने एक दो बार और सोचा क्या करू. चूँकि घर की माली हालत बहुत बिगड़ गयी थी मैने मजबूरन स्वामीजी से संपर्क करने की ठनी. हो सकता है उनके पास हमारी परेशानी का उपाय हो.

अगले दिन मैं नहा के आचे सी सारी पहाँ के स्वामी के आश्रम मैं गयी. स्वामी जी देखने मैं 56 से 60 के उमर के लग रहे थे. उनके आस पास भक्त जान बैठे थे. उनके दोनो बाजू मैं 2 लड़किया करीब 30 की उमर की सफीड सारी मैं खड़ी थी. स्वामीजी भगवान और शॅंटी की बाते कर रहे थे. सत्संग ख़तम होने के बाद सब लोग एक एक कर के स्वामीजी से मिलने जाने लगे.

जब मैं उनके पास पहुँची तो वो मुस्कुराए और मुझे आशीर्वाद दिया, “पुत्री तुम्हारी माथे की लकीर देख के लगता है की तुम घोर कष्ट से गुजर रही हो. बताओ क्या कष्ट है. स्वामीजी तेरा कष्ट डोर कर देंगे……..कल्याण हो पुत्री…………. तेरा सारा कष्ट डोर हो जाएगा.”

स्वामीजी से मिलने के बाद उन्हो ने मुझे इंतज़ार करने को कहा. मैं साइड मैं जा के इंतज़ार कर रही थी. सब के जाने के बाद स्वामीजी ने मुझे बुलावा भेजा. मैं उनके पास गयी. स्वामीजी के साथ उनकी 2 सेविका भी थी जिन्होने वाइट सारी पहाँ न्यू एअर थी. एक शिष्या भी था जिसने धोती पहाँा था.

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स्वामीजी मुझे आपने सामने बैठाए और पूजा करने लगे. वो कुछ मंतरा का जाप कर रहे थे और उनकी सेविका पेछे दिया ले के खड़ी थी. स्वामीजी की आँखे बेंड थे और वो आपने हूठ हिलाते जा रहे थे जैसे की मॅन मैं कोई मंतरा का जाप कर रहे हो. फिर स्वामीजी ने आँखे खोली.

फिर उन्हो ने मुझे गंभेरता से देख के कहा “जिसका डर्र था वोही हुआ पुत्री, तुम्हारे जानम पत्रिका मैं दोष है. जिसके वजह से तुम्हारे परिवार के विकास मैं अर्चन आ रही है. इश्स के लिए यगया करवाना होगा. इसका उपचार करना पड़ेगा. पूजा करवाना होगा.”

स्वामीजी की बात सुन के मैं थोडा घबुरा गयी थी.

मैने स्वामीजी से कहा “स्वामीजी इसका कोई उपाय बताइए. मैं कोई भी पूजा करने के लिए तय्यार हूँ”.

फिर स्वामीजी ने कहा “कल तुम स्वच हो के नये वस्त्रा डाल के बिना सिंदूर लगाए और मंगल सट्रा पहाँे आशारम मैं आ जाना करीब 12:30 बजे. हम कल से पूजा शुरू कर देंगे. ख़याल रहे, किसी को भी इस पूजन के बारे में मत बताना वरना विघ्ना प़ड़ जाएगा.”

फिर मैं वाहा से निकाल के आपने घर आ गयी. पूरी रात मैं सो नही पा रही थी, ये सोच के की मेरे कुंडली मैं दोष है. मेरी वजह से घर में सारा विघ्ना हो रहा है. मैं आपने आप को कोसते जा रही थी की मेरे वजह से मेरे परिवार पे मुसीबत और पति पे अर्चनाए आ रही है. मैने ताना की अगर मेरी वजह से मुसीबत आई है तो मैं ही इसे सुधरँगी भी.

अगली सुबा मैं आपने पति को नाश्ता करा के आपने बचो को स्कूल छोढ़ने के बाद वापस घर आई. मेरे पति भी नाश्ता कर के दफ़्तर के लिए निकाल चुके थे. मैने घर का सारा काम ख़तम किया फिर नहाने चली गयी. मैं आचे से नहा के एक पेले रंग की सारी मैं तैयार हुई. मैं फिर बिना सिंदूर लगाए और बिना मंगलसूत्रा के स्वामीजी की आश्रम चली गयी. आज आश्रम मैं कोई नही था.

गुरुजी के सिश्‍यो ने सबको कॉल कर के बता दिया था की आज आश्रम मैं कोई अनोखी पूजा है जिसके कारण वो आज किसी से नही मिलेंगे. मैं वाहा पहंची तो गुरुजी के सेविकाऑन ने मुझे अंडर का रास्ता दिखाया. वो मुझे अंडर कमरे मैं ले के गये. वाहा अंडर एक बेड था और उसेस बेड के सामने वाले जगह मैं स्वामीजी ने एक यगया का वेदी खड़ा किया था. मैने सोचा की यही स्वामीजी यगया भी करते हूगे और फिर रात मैं सूटे हूगे.

मेरी सोच को रोकते हुए उनकी एक शिष्या बोली, “तुम बिल्कुल सही जगह आई हो….. स्वामीजी तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर देंगे……. उनके पास बहुत बड़ी शक्ति है………… अभी तुम उनके साथ पूजन में बैठो, हुमलोग बाहर जाते है. तुमने किसी को बाते तो नही की यहाँ आई हो.”

मैने ना में सर हिलाया. स्वामीजी ने मुझे बैठने के लिए कहा. हम सब वही फर्श पे बैठ गये. स्वामीजी मंतरा बोल के अग्नही मैं गीयी डाल रहे थे.वो मंतरा का उचरण करते जा रहे थे. फिर एक सेविका बाहर से दूध का ग्लास ले के आई. बाबा ने थोडा दूध अग्नही मैं डाला और फिर दूध को हाथ मैं पकड़ के कुछ मंतरा बोला और फिर वो दूध मुझे पीने को कहा.

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बोले, “इसे पे जाओ………. इस से तुमहरि आत्मा शुद्ध होगी.”

मुझे डर लगा मगर मैं डरते डरते दूध हाथ में ले लिया. मैने दूध एक ही घूँट मैं पूरा पे लिया. दूध पीने के बाद मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा. अचानक ही मुझे नशा सा चड़़ने लगा. मेरी आँखो के आयेज अंधेरा च्चाने लगा. मैं बेहोश सी हूने लगी. मैं फर्श पे ही गिर पड़ी. मुझे होश तो था की क्या क्या हो रहा है पर मैं उसका विरोध नही कर पा रही थी. मुझे महसूस हुआ की कुछ जाने मिल के मुझे उठा रहे है और फिर उन्हो ने मुझे पलंग पे लेता दिया. मैं आँखें खोल के सब देख रही थी मगर कुछ कर नही पा रही थी.

फिर उसेस स्वामी ने आपने शिष्यो को बाहर इंतज़ार करने के लिए कहा. स्वामीजी फिर जा के कमरे का डरवाज़ा बेंड कर दिए और अंडर से कुण्डी लगा दी. फिर स्वामीजी मेरे पास आए और उन्हो ने मेरी सारी का पल्लू खींच के हटा दिया. वो मेरे सीने पे हाथ फेर रहे थे और कुछ मंतरा बोलते जा रहे थे. फिर उन्हो ने मेरी सारी को मेरे बदन से अलग कर दिया. अब वो मेरे सीने और पायट दोनो जगह हाथ फेरते जा रहे थे.

मुझे उत्तेजना हो रही थी…….फिर मेरे बदन में एक अजीब सी सिहरन होने लगी. मेरे पायट पे हाथ फेरते-फेरते वो मेरी नाभि मैं आपनी उंगली बार-बार घुसा रहे थे. फिर वो उपर आए और एक-एक कर के मेरी ब्लाउस का हुक खोलने लग गये. मेरी आँखे आपने आप बेंड होने लगी. उसके बाद वो मेरे से लिपट गये और आपना हाथ पेछे लेजा के मेरी ब्रा का हुक पेछे से खोल दिया.

फिर उन्हो ने मेरी ब्लाउस और मेरी ब्रा को निकाल के मेरे से अलग कर दिया. मैं शरम से मारी जा रही थी मगर बेबस थी उस नशीली ड्रिंक की वजह से. मैं कमर से उपर बिल्कुल नंगी हो गयी थी. उन्होने हाथ में कोई सुगंधित तेल लिया था और वो मेरे सीने में मलने लगे. मेरी धड़कन ढोँकनी की तरह चल रही थी. मेरी साँसे उपर नीचे हो रही थी. मेरे बदन से सुगंधित तेल की वजह से एक खुश्बू आने लगी.

स्वामीजी मेरे बाजू मैं बैठ गये और मेरे स्तन को दबाने लग गये और नेरी नहीपल को पिंच करने और पुल करने लग गये. वो मेरी बिगड़ती हालत को देख रहे थे और समझ रहे थे. मुझे नशे मैं उनकी यह हरकत अछी लगने लगी. मेरे बदन मैं अजीब सी हलचल होने लगी. वो मेरे स्तन को बार-बार दबा रहे थे और मेरी नहीपल्स से बारी-बारी खेल रहे थे.

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फिर वो और करीब आए और मेरी चुचि आपने मूह मैं ले कर चूसने लग गये थे. स्वामीजी मेरी चुचि चूस्ते-चूस्ते उसे बीच-बीच मैं काट भी रहे थे. चुचि चूस्ते-चूस्ते वो मेरी नाभि मैं भी उंगली घुसते जा रहे थे. मुझे उनकी सारी हरकते अच्छी लग रही थी. लग रहा था मनो मैं बहुत दिन बाद कोई मेरी नहीपल चूस रहा था. अरुण ने काई दिन से मुझे च्छुआ भी नही था क्यूंकी वो आपनी परेशणिओ में ही घिरा रहता था. आज पता लग रहा था की मेरे बदन में आज भी आकर्षण है… यानी मैं आज भी किसी को पागल बना सकती हू.

स्वामीजी बोलते जा रहे थे, “तुम एकद्ूम शांत हो के इस पूजा का आनंद लो………….मैं तुम्हारी सब परेशानी डोर कर दूँगा. तुम्हारे बदन को शुद्ध करना पड़ेगा……”

फिर स्वामीजी ने मेरे गर्दन पे हूठ लगा दिए और चूमने लगे, फिर दया स्तन चूमना शुरू किया और मेरे बाए स्तन दबाते जा रहे थे. वो साथ साथ कुछ मंतरा भी बोलते जा रहे थे……. बहुत मादक माहौल था… रूम में एक दिया जल रहा था और अग्नही वेदी से नहीकालने वाली रोशनी से कमरा नहा रहा था. पूरा कमरा सुगंधित था….मेरे उपर स्वामीजी नंगे बदन झुके हुए थे……… मेरा भी स्तन नंगा था.

फिर उन्हो ने मेरे हूथो पे आपने हूथ रखे और मेरे हूथ को चूसना शुरू कर दिए. मेरे हूथ चूस्ते चूस्ते उन्हो ने आपना जीभ मेरे मूह मैं घुसा दिया. उनके जीभ में एक अजीब सा स्वाद था….. वो मेरा जीभ चूसने लगे. मुझे महसूस हो रहा था की वो मेरे मूह के अंडर चाट रहे है. वो उठ के मेरे चेहरे को देखने लगे कही मैं परेशन तो नही लग रही……… मगर मेरे चेहरे से एक खुशी की झलक मिली उन्हे.

स्वामीजी बोले, “कैसा लग रहा है पुत्री………..तुम्हारे दिल में जो भी परेशानी है दिल से निकाल दो…….मैं दिल पे मंत्रो से उपचार कर रहा हू…”

फिर ज़ोर ज़ोर से मंतरा उच्चारण करने लगे…. बहरा बैठे उनके शिष्या भी ज़ोर ज़ोर से मंत्रोचर करने लगे.. मुझे लगा मैं किसी स्वर्ग में हू और मेरा रेप होने वाला है…….. मुझे लगा अब स्वामीजी मुझे चोद के ही छ्चोड़ेंगे. शायद उनके शिष्या भी मेरी इस नशे की हालत का फयडा उठाएँगे. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी की मैने किसी को बताया नही यहा आने के बारे में…. अगर मैं विरोध करती हू तो ये मुझे मार डालेंगे और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा. मैं वाहा से भागना चाहती थी मगर नशे की वजह से मैं कुछ कर नही पा रही थी…….. चुप छाप लेट के उनकी करिया का आनंद ले रही थी.

स्वामीजी बोले, “अभी तुम्हारा मुख शुद्धा हो गया अब बाकी शरीर को शुद्ध करना है……. अब मैं नीचे बढ़ुंगा……… तुम मेरे साथ देती रहो फिर तुम बिल्कुल उलझन मुक्त जीवन जी लॉगी.”