पहला अनुभव लण्ड चूसाई का

मैं सबसे पहले अपने बारे में बता दूँ। मैं ३५ वर्ष का पुणे में रहने वाला व्यवसायिक शादीशुदा मर्द हूँ। मैंने अपने जीवन में १६ साल की उम्र से चुदाई का अनुभव लिया हैं!! मेरी एक पत्नी और एक बेटा है और मैं एक बहुत ही चुड़क्कड़ मर्द हूँ!!! !!मेरी वासना की आग मेरी पत्नी से पूर्ण नहीं हो पाती। यह बात वह भी अच्छी तरह से समझ चुकी हैं। शायद मेरी ज़रूरत पूरा करने के लिए उसने एक दिन मुझे अपनी एक ऐसी सहेली से मिलाया, जो आसानी से चुद्ने के लिए तैयार हो गई…उस सहेली का नाम था – सुमेधा। सुमेधा एक सुंदर महिला थी, जिसकी उम्र करीब ४२ की होगी। लेकिन उसके नखरे किसी भी मर्द को दीवाना बनाने के लिए काफ़ी थे!!

गोल मटोल चुचे… बड़ी सुडौल गाण्ड… गोरा चिटा रंग… होंठों पर लगी डार्क रंग की लिपस्टिक… कातिलाना नजरें… इन सारी बातों ने मुझे तो बेताब कर ही दिया था!!! लेकिन मैं सबकुछ समझकर भी कुछ कर नहीं पा रहा था।

सुमेधा का अब अचानक हमारे घर आना जाना बढ़ने लगा। हमे भी उसके घर से आमंत्रण आने लगा।

वो कभी कभी मुझे कुछ चुटकुले एस एम एस करने लगी। कभी कभी ऑफीस भी मिलने आने लगी। रास्ता साफ था, पर मैं पहल नहीं कर पा रहा था…

एक दिन मैं घर पर था और सुमेधा आई। मेरी पत्नी से बातें करने लगी और मैं अपने बेड रूम में टीवी देखता रहा।

अचानक प्रोग्राम बना की सुमेधा, उसका पति और बेटा हमारे यहाँ ही खाना ख़ाके घर जाएँगे। सुमेधा ने अपने पति और बेटे को फोन करके खाने के लिए हमारे घर बुला लिया।

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अभी तो सिर्फ़ ६ बजे थे। सुमेधा के पति ने ८.३० बजे तक आने के बारे में बताया। बेटा बोला – मैं नहीं आ सकता, मैं अपने दोस्तो के साथ बाहर ही खा लूँगा।

मेरी बीवी ने कहा – अब मेहमान आने वाले हैं, मैं कुछ बाजार से चिकन लेकर आती हूँ!!

मुझे लगा दोनों सहेलियाँ साथ में जाएँगी, लेकिन दरवाजा बंद होने के साथ सुमेधा मुझे आवाज़ दे रही थी।

मुझे लगा कुछ भूल गई होगी, इसलिए वापस आई होगी। मेरा बेटा उस समय क्लास गया हुआ था। आते समय बीवी उसे भी लेकर आने वाली थी।

बेड रूम से बाहर आकर मैंने पूछा – क्या हुआ?

सुमेधा बोली – हम आपके लिए यहाँ आए हैं और आपं हैं की टीवी में अटक गये है!!

इतना कह कर वह मेरे करीब आ गई और मुझसे लिपटते हुए बोली – बहुत कम समय है, हमारे पास। अब मैं नहीं रह सकती…

मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। लेकिन मैंने कहा – अभी तो संभव नहीं, इतने कम समय में हम सिर्फ़ गरम हो जाएँगे और इतनी देर में तो मेरी बीवी आ जाएगी!!

उसने कहा – बहुत दिनों से तडप रही हूँ, सोनू (उसने द्वारा मुझे दिया हुआ प्यार का नाम) तुम्हारे लिए… आज करीब आने का मौका मिला है… कम समय मैं हम जो कर सकते हैं, वो कर लेने दो… इतना कह कर उसने मेरी ज़िप खोलकर लण्ड बाहर निकाल लिया और मज़े से चूसने लगी!!!

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मेरे जीवन का लण्ड चूसाई का यह पहला अनुभव था!!! !!

मैं गरम हो चुका था और मेरा लण्ड फनफना कर उठ गया था, इतना मोटा हो गया था कि वो पूरे लण्ड को अपने मुँह में समा नहीं पा रही थी!! सिर्फ़ एक चौथाई लण्ड उसके मुँह में था… लेकिन उसका आनंद कुछ और ही था!!…

मैं अब अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और मन में डर था कि बीवी ना आ जाए।

मैंने उसे उठाया और उसकी साडी उपर उठा दी!! फिर ड्रॉयिंग रूम के सोफे पर लिटाकर उसकी पैंटी सरका दी और अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया…

उसने कहा – धीरे से, मैंने आज तक इतना बड़ा लण्ड अपने अंदर नहीं लिया और ना ही देखा है!!!

मैंने धीरे से उसकी चूत में लण्ड अंदर सरका दिया…

उसकी चीख निकल पड़ी!!…

मैं पूरे जोश मैं था और मन मे बीवी के आने का डर था पर मैंने उसकी एक ना सुनी और झटके लगाने शुरू किए। अब वह भी मस्ती में आ गई और मेरा साथ देने लगी और कहने लगी – ज़ोर से करो, मेरे सोनू… आज इस चूत की प्यास बुझा दो… इसे फाड़ दो…

इस तरह की बातों से वो मेरा जोश बढ़ा रही थी!!! उसकी चूत से पानी निकल चुका था…

अब ड्रॉयिंग रूम में पच पच की आवाज़ें आ रही थीं। यह आवाज़ मुझे और मदहोश कर रही थी!!

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अब मैं और तेज़ी से उस पर चढ़ गया। उसने मुझे रोका और सोफे पर ही कुतिया पोज़ में झुक गई। मैं फिर शुरू हो गया…

वह अपनी गाण्ड हिलाकर मेरा साथ दे रही थी। अचानक उसने मुझसे चूत में पानी न छोड़ने के लिए कहा।

मैं अपने सुख की चरम सीमा पर पहुँच चुका था, वह हट गई और मेरा लण्ड मुँह मे लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी!!!

मेरा पानी निकलने वाला था, मैंने उसे दूर करने की कोशिश की… मेरे लिए मुँह में पानी छोड़ने का यह पहला अनुभव था!!…

वह उसे गट गट पी रही थी। ऐसा लगा कि उसे यह स्वाद अच्छा लग रहा हो।

फिर हम एक दूसरे से अलग हो गये। उसने अपनी साड़ी ठीक कर ली।

मैंने कहा – धन्यवाद।

उसने कहा – अभी तो और बाकी है!! यह तो ट्रेलर था, पूरी पिक्चर अभी बाकी है… लेकिन जो आज तुमने मुझे खुशी दी है, वो मेरी शादी के २० सालो में और पूरे जीवन के शारीरिक सुख मे सबसे अधिक है… तुमने इतने कम समय में मेरी चूत की आग को शांत कर दिया… हम जल्दी कहीं बाहर मिलेंगे…

इतने में दरवाजे पर घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला, जैसे कुछ हुआ ही नहीं…

कुछ देर में उसका पति आया, खाना हुआ और वो घर चले गए।

कई दिन हमे फ़ोन पर ही बातें करनी पड़ी, लेकिन वो बातें भी बड़ी रोचक है और आख़िरकार हम फिर मिले!!!

आगे क्या हुआ, यह फिर कभी।