घर मे एकेली लड़की – Real sex stories in hindi – 2

घर मे एकेली लड़की – Real sex stories in hindi – 2
मैं : मुल्ला जी, लगता है गला कुछ ज़्यादा ही बड़ा हो गया है. देखिए ना अछा नही लग रहा.

मुल्ला जी : नही नही ये तो बहोट जाच रहा है.

उस्मन : मेडम, आप कमाल की दिख रही हैं. और ये अछी भी लग रही है आपकी चोली, (उसने मेरी क्लीवेज तो एक तक देखते हुए कहा)

मुझे शरम तो आ रही थी बुत इतना अटेन्षन अछा भी लग रहा था.

मैने सोचा चलो कोई नही, और कपड़े बदलने जाने लगी.

उस्मन : मेडम ऐसे ही चलिए, आपको देख के सब खुश हो जाएँगे और वैसे भी घर जाके पहें ना ही है.

मैने भी सोचा ठीक ही कह रहा है. मैने आपने कपड़े उठाए तो उसमे मेरी ब्रा नही थी. मैने जब आपनी ब्रा माँगी तो मुल्ला जी बोल पड़े की अब तो आप ब्रा पहाँेंगी नही तो उसे यही छ्चोड़ जाइए, हुमारे काम आएगी. मुझे नही पता था वो किस काम आएगी उनके पर मैने पैसे दिए, आपने कपड़े लिए और घर की चल पड़ी. उस्मन बस मेरी क्लीवेज ही देखे जा रहा था. उसके चेहरे को देख के मुझे गुस्सा नही बल्कि दया आ रही थी उसपे. मैने उसे कहा उस्मन गाड़ी चलाओ, मैं घर पे हमेशा सामने ही रहूंगी. वहाँ देख लेना जी भर के.

वो चोलियान मुझपे कुछ ऐसी दिख रही थी

मैं घर पह्ोची तो टाई जी मुझे देख के बहोट खुश हुई.

टाई जी : वाह कितनी प्यारी लग रही है, एक दमऔरत लग रही है तू.

मैं : ओह टाई जी, अभी तो मैं लड़की हू ना, औरत क्यूँ बना रही हो.

टाई जी : नही नही तू तो एकद्ूम औरत ही लग रही है, कितना प्यारा शरीर है तेरा. तू भी कहाँ शहर के कपड़ो मे इसे धक के रखती थी.

मैं : अब तो यही पहें ना है घर मे.

टाई जी: चल आज से तेरे दादा जी और बड़े टॉ जी के लिए खाना तू ही लेके जाना. तुझे देख के बहोट खुश हूगे.उनका पूरा ख़याल रखना.

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मैं : जी टाई जी, मैं पूरा ख़याल रखूँगी. दादा ग को दादी की और टॉ जी को टाई जी की कमी नही महसूस होने दूँगी.

मैं बोर हो रही थी तो किचन मे चली गई. किचन मे हमारे सारे नौकर इकते ही बैठा करते थे जब काम नही होठा था तो. मैं वहाँ गई तो सब मुझे देखने लगे.

लीला : वाह बेबी जी, कितनी प्यारी लग रही हो.

उस्मन : हाँ कसम से लीला, इनको देख के अब तुझे देखना का दिल ही नही करता.

लीला : हाँ हाँ अब क्यूँ देखेगा मुझे, तेरी आखों के सामने ये 2-2 कबूतर जो उस रहे हैं. ( उसका इशारा मेरी चुचियों की ओर था जो मैं समझ गई और मुझे शरम भी आई.)

वहाँ सब के सब बस मेरी क्लीवेज ही घुरे जा रहे थे. मुझे अछा भी लग रहा था और शरम भी आ रही थी.

लीला : अब तुम लोग बस भी करो, कितना देखोगे. बेबी जी कही भागी थोड़ी ना जा रही हैं. आमेड काका आप भी ऐसे देख रहे हैं जैसे पहले लड़की ही नही देखी.

आमेड काका : अरे इस घर मे एक तू ही एकेली लड़की थी, अब अनामिका आई है तो घर मे नयी खूबसूरती आ गई लगता है.

मैं : लीला देख ना ये घग्रा बस मेरे घुटनो तक है, इसे थोडा नीचे होना चायए था ना.

लीला : अरे बेबी जी वो इसलिए क्यूंकी आपने इसे इतना उपर जो बँधा है, इसे थोडा नीचे करिए.

ये कहते हुए उसने मेरा घग्रा थोडा नीचे खींचा तो मेरी पेंटी दिखने लगी.

लीला : अरे बेबी ग ये क्या आपने कची पहाँी है, ुअतरिय इसे. घग्रे के अंडर कोई कची पहाँता है भला.

मैं : तू पागल है क्या ??रहाँे दे मुझे नही उतरनी.

लीला : बेबी ग उतार दीजिए कची, देखिए घग्रा कितना छ्होटा लग रहा है ऐसे, कही टॉ ग गुस्सा ना हो जायें पहले ही दिन.

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मैने भी सोचा ठीक ही कह रही है, मैं कमरे मे गई और पेंटी उतार दी. मैने सोचा अजीब पहाँावा है गाव का. पहले ही दिन ब्रा पेंटी दोनो उतार गई मेरी. पर घग्रे मे से अंडर काफ़ी खुला हुआ फील हो रहा था. और ये मुझे अछा लग रहा था.

शाम को बड़े टॉ जी सबसे पहले घर आए, आते ही लीला को आवाज़ लगाई.

टॉ जी : लीला ओ लीला, कहाँ है.

लीला : आई बड़े साहब.

इतना कहते ही उसने एक बड़ा सा बुर्तन उठाया और उसमे थोडा गरम पानी डाला.

मैं : ये क्या कर रही हो लीला ?

लीला : बड़े साहब जब भी घर आते हैं तो उनके पैर गरम पानी मे डालके धोती हू मैं, उनके पावं मे दर्द रहता है ईसीए.

मैं : ला मुझे दे, मैं धौँगी आज से. इतना कहते ही मैने वो बुर्तन लिया और टॉ जी के कमरे मे पह्ोछ गई.

टॉ जी ने मुझे देखा और उपर से नीचे तक एक तक देखते रहे.

टॉ जी : अरे तुम ? लीला कहाँ है ?

मैं : टॉ जी, लीला खाना बना रही है, लाइए मैं धो देती हू आपके पैर. आज से मैं ही धौँगी आपके पैर.

टॉ जी बिस्तर पे पैर नीचे किए हुए बैठे थे. मैने उनका पाजामा उपर किया और एक एक करके पैर ढोने लगी. ढोते ढोते हल्की मालिश भी कर रही थी. मैने उपर देखा तो पाया की वो एक तक मेरी चूचियो को देखे जा रहे हैं. उपर बैठे होने के कारण शायद अंडर तक दिख रहा था.

टॉ जी : कितनी अछी लग रही हो तुम इन कपड़ो मे, आयेज से यही पहाँोगी तुम घर मे.

मैं : जी टॉ जी.

मैने टॉ जी के पैर धोए और फिर उसपे तेल से हल्की मालिश की. फिर मैं नीचे किचन मे चली आई.

लीला मुझे देख के मुस्कुराते हुए पूछने लगी की क्या क्या हुआ ??

लीला : दीदी क्या क्या हुआ उपर ?

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मैं : कुछ नही मैने टॉ जी के पैर धोए और नीचे आ गई.

लीला : बस ?? मैं तो उनके पुर शरीर की मालिश करती हू.

मैं : ओह लीला की बची पहले नही बता सकती थी. टॉ जी नाराज़ हो रहे हूगे ना.

लीला : कोई बात नही, पहला दिन था. धीरे धीरे सब सीख जाओगी किसे कैसे खुश करना है ( हेस्ट हुए ).

मुझे लीला की बात कुछ अजीब तो लगी पर फिर मैं आपने कमरे मे आ गई.

अगले दिन मैं सुबह उठी तो घग्रा पूरा उपर उठा हुआ था और मेरी चुत एकद्ूम खुली हुई थी.

मैने जल्दी से घग्रा ठीक किया और बिस्तर से उठी. रात को लीला काफ़ी देर तक मेरे कमरे मे ही थी और वो डरवाज़ा खुला छ्चोड़ गई थी. मैं उठी और हाथ मु धोके बाहर आई और लीला को ढूँडने लगी. कुछ देर बाद लीला मुझे बड़े टॉ जी के कमरे से बाहर आती दिखी.

मैं : लीला क्या कर रही थी ?

लीला : वो सुबह नहाने से पहले बड़े सबाह की मालिश करती हू मैं, वो करके आ रही थी.

मैं : मैने तुमसे कहा था ना की अब मैं करूँगी सारे काम बड़े टॉ जी के ?

लीला : आप सो रही थी बेबी जी, मैने लखन और उस्मन दोनो को आपके कमरे मे भेजा था आपको उठाने के लिए, पर आप उठी ही नही.

मैने सोचा लखन और उस्मन दोनो ने तो मुझे ना जाने किस हालत मे देखा होगा, मेरा तो पूरा ल़हेंगा ही उठा हुआ था और मेरी चुत तक दिख रही थी.

मैं : आयेज से ध्यान रखना, मुझे ही बुलाना ठीक है ?

यू तो मुझे घर के सभी मर्द घूर घूर के देख रहे थे लेकिन मैं आप लोगो को इन मर्दो के साथ हो रहे एनकाउंटर्स एक एक करके ही बतौँगी ताकि कोई कन्फ्यूषन ना रहे और कहानी का नयापन बुरकरार रहे.