अशफ़ाक का लंड – [भाग 2

antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta अशफ़ाक का लंड मेरी चूत में धमाशान किये हुए था और मैं भी अपने कुल्हें उठा उठा के उसे और मजे दे रही थी. उसके गर्म गर्म होंठो से वो मुझे बदन पर इधर उधर किस कर रहा था और अपने लौड़े को चूत की गहराई में रगड़ता जा रहा था. अशफ़ाक की साँसों की गति बढ़ चुकी थी और उसके लंड में एक अलग ही शक्ति आई हुई थी. मैंने उसे गले से लगाया हुआ था और अभी वो मेरे शोल्डर पर अपने होंठो से चुम्मियां ले रहा था.
लौड़ा ताकतवाला था

अशफ़ाक के होंठो की मादकता मेरे बदन में एक अलग ही गुदगुदी कर रही थी. मैं अपना सब कुछ उस कड़े लौड़े के सामने न्योछार कर देना चाहती थी जैसे. मेरे मन में अपनी जवानी के दिन आ रहे थे जब घनश्याम की चुदाई में यह बात थी. मैं सब कुछ भूल के अशफ़ाक की बाहों में झूल रही थी और वो अपने कड़े लौड़े से मुझे धक्के दे रहा था. उसका लंड मेरे बच्चेदानी को स्पर्श कर रहा था और मैं सेक्स के असीम सागर में डुबकियाँ लगा रही थी. अशफ़ाक की मजबूत बाहें मुझे थामे हुए थी और वो अपने लौड़े से मेरी चूत को संतृप्तता दे रहा था. मैं भी अपनी गांड हिला हिला के उसे जोर जोर से सुख दे रही थी.

तभी अशफ़ाक ने लौड़ा मेरी चूत से निकाल दिया. मैं उठी और उसने मेरा हाथ पकड के मुझे उल्टा लिटा दिया. वो मेरे कुल्हें खोल के मेरी गांड के छेद को देखने लगा. मैं कुछ समझ पाती उसके पहले तो उसका मुहं मेरी गांड चाटने लगा. वो अपनी जबान से गांड के छेद को चाट चाट के साफ़ करने लगा. मैंने आह आह की आवाज से उसे नशे को बर्दास्त करने लगी. अशफ़ाक ने अपने दोनों हाथ से मेरे कुल्हें खोले और वो गांड के साथ साथ चूत के ऊपर भी अपनी जबान को रगड़ने लगा. मैं उस नशे को ज्यादा देर बर्दास्त नहीं कर पाई. उसके मुहं को चूत पर लगाते ही मेरा पानी छुट पड़ा. अशफ़ाक ने कुत्ते की तरह जबान से मेरी चूत को साफ़ कर दी.

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फिर उसने अपने लौड़े को मेरी चूत पर रख दिया. एक झटके में उसका लंड मेरी चूत को रगड़ने लगा. वो मेरी गांड को पकड के आगे पीछे करने लगा और मैं आह आह कीआवाज लगा के उसके लौड़े को मदहोशी से लेने लगी. अशफ़ाक का लौड़ा बड़ा ही टाईट हो रहा था चूत में इस पोजीशन में तो, वो जोर जोर से पूरा लौड़ा चूत में घुसेड देरहा था. उसके हाथ आगे मेरे बूब्स पर आ गए थे. वो मेरी चुंचियां दबाता हुआ मुझे धक्के देरहा था. उसकी उंगलियाँ मेरी निपल्स को जोर से दबा रही थी. मदहोशी और सेक्स की खुमारी अपनी चरमसीमा के ऊपर थी.

तभी अशफ़ाक की एक ऊँगली मेरी गांड पर घुमने लगी. फिर उसने उस ऊँगली के ऊपर अपना थूंक लगाया. चिकनी की हुई ऊँगली को उसने धीरे से मेरे पिछवाड़े के छेद पर रखा और अंदर करने लगा. वाऊ, मुझे अच्छा लग रहा था जब वो मेरी गांड में ऊँगली कर रहा था.

“क्या कर रहे हो अशफ़ाक?” मैंने जानबूझ के उस से कहा.

“भाभी आगे करता हु तो पीछे वाले का भी कुछ हक़ बनता हैं, वैसे आप के कुल्हें देख के कोई भी पागल हो सकता हैं.” अशफ़ाक ने ऊँगली अंदर कर दी थी अभी.

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“सच्ची?” मैं मन ही मन अपनी तारीफ़ सुन के खुश थी.

“मुच्ची.” और उसने ऊँगली को गांड में पूरी अंडर डाल दी. मैंने छटपटा गई क्यूंकि मुझे एकदम से झटका लगा था बदन के अंदर.

अशफ़ाक अब मेरी चूत को झटके दे के ठोक रहा था और गांड में ऊँगली डाल के उधर भी उत्तेजना देता जा रहा था. मैं उसे समर्पित हो गई थी जैसे. वो जो भी करता मैं करवाने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से एकदम तैयार थी.

अशफ़ाक ने अपना लौड़ा तभी बहार निकाला. उसने उसे मेरे मुहं के सामने रख दिया. लौड़ा पूरा चिकना था जिसके ऊपर मेरी चूत का रस लगा हुआ था. मैंने लंड मुहं में ले लिया और उसे चाटने लगी. चाट के साफ़ कर दिया पूरा तो अशफ़ाक ने उसे वापस निकाल लिया.
पिछवाड़े में भी दस्तक दे दी

अब उसने मेरे कुल्हें दोनों तरफ से पकडे और उन्हें चौड़ा किया. फिर वो मेरी गांड के छेद के ऊपर थुंका. मुझे अजीब लगा लेकिन सेक्स में सब चलता हैं भाई. अशफ़ाक ने अब अपना मोटा लौड़ा रखा गांड पर और मेरे बदन में गुदगुदी होने लगी. अशफ़ाक ने एक ही झटके में मेरी गांड में अपने लौड़े को परो दिया. उफ्फ्फ क्या दर्द था एक अरसे के बाद गांड में लौड़ा लेने में. मैं अपने हाथ से अपनी गांड को फैला दिया ताकि दर्द की असर कम हो सकें.

अशफ़ाक अब उपर उठा और अपने लौड़े को धीरे धीरे अंडर बहार करने लगा. मुझे बहुत पेन हो रहा था लेकिन मीठा मीठा दर्द एन्जॉय भी करवा रहा था.

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दो मिनिट हलके हलके पेलने के बाद अशफ़ाक ने अपनी चुदाई की गति को एकदम से बढ़ा दिया. उसका लौड़ा गांड में ऐसे अंडर बहार होने लगा जैसे मेरी गांड को फाड़ के रख देनी हो. उसकी साँसे तेज हो चुकी थी और पसीना उसके मस्तक से टपक रहा था.

मैं भी बेताब थी और उसके लंड को भोग रही थी अपनी गुदा के अंडर.

“आह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह भाभी जी…..!” इतनी आवाज निकाल के अशफ़ाक ने अपनी लंड की पाइप से मेरी गांड में वीर्य भर दिया.

उसने लौड़ा धीरे से बहार निकाला और मेरे कुल्हें खोले. उसका वीर्य बूंद के स्वरूप में बहार टपकने लगा. उसे देख के अशफ़ाक के चहरे पर अजब सी ख़ुशी थी…!

“अशफ़ाक तुम्हे गांड मारने का बड़ा अनुभव लगता हैं!”

“हां भाभी, दुबई में रूम में हम लोग यह सब तो करते हैं. दिरहम में चूत चोदने से अच्छा किसी खंजर को ढूँढ के उसे पेलो…!”

“ही ही ही….पागल..!”

इतना कह के मैं उठ खडी हुई. अशफ़ाक ने निचे पड़ी हुई पेंटी से अपना लौड़ा साफ़ किया. पहली बार किसी ने मुझे गन्दी गिफ्ट दी थी…!

दुसरे महीने ही हुस्ना और अशफ़ाक की शादी हो गई. अशफ़ाक मुझे आज भी कभी कभी गांड मरवाने के लिए बुला लेता हैं. उसकी बीवी रुढीचूस्त हैं और गांड मरवाना पाप समझती हैं. अशफ़ाक कहता हैं की उसकी ख्वाहिश हैं हुस्ना और मुझे एक ही बिस्तर में पेलने की, देखती हूँ वो अवसर आता हैं कभी या नहीं!